जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और बढ़ते कृषि जोखिमों के बीच किसानों के लिए एक नई उम्मीद सामने आई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत आने वाले भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR), हैदराबाद ने ऐसी ‘स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी‘ विकसित की है, जो बीजों की गुणवत्ता सुधारने, अंकुरण बढ़ाने और फसलों को शुरुआती चरण में मौसम व रोगों के प्रभाव से बचाने में मदद कर सकती है.
संस्थान के अनुसार, यह तकनीक जैव–अपघटनीय (बायोडिग्रेडेबल) बायोपॉलिमर आधारित कोटिंग पर आधारित है. इसके जरिए बीजों के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बनाई जाती है, जिसमें लाभकारी सूक्ष्मजीव, पोषक तत्व, सूक्ष्म पोषक तत्व और पौधों की वृद्धि बढ़ाने वाले तत्व शामिल किए जा सकते हैं. इससे बीजों को अंकुरण के समय ही आवश्यक पोषण और सुरक्षा मिलती है.
आईसीएआर–आईआईओआर द्वारा किए गए फील्ड परीक्षणों में इस तकनीक के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. तेलंगाना में तमाम किसानों के खेतों पर किए गए प्रदर्शन परीक्षणों में मूंगफली और सोयाबीन की फसलों में पारंपरिक खेती की तुलना में करीब 30 प्रतिशत तक अधिक उपज दर्ज की गई. वहीं विभिन्न फसलों पर किए गए बहु–स्थान परीक्षणों में 12 से 37 प्रतिशत तक उत्पादकता बढ़ने के संकेत मिले हैं.
वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में तकनीक खासतौर पर उपयोगी
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक विशेष रूप से वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. देश का बड़ा कृषि क्षेत्र अब भी मानसून पर निर्भर है, जहां देर से बारिश, सूखे की स्थिति, मिट्टी में नमी की कमी और कीट–रोगों का खतरा फसल स्थापना को प्रभावित करता है. ऐसे में स्मार्ट बीज तकनीक शुरुआती विकास चरण में पौधों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकती है.
कई फसलों में इस्तेमाल हो सकती है यह तकनीक
संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक यह केवल एक साधारण बीज उपचार तकनीक नहीं है, बल्कि एक बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्म है. इसे अनाज, मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, कपास, चारा फसल, सब्जियों, मसालों और बागवानी फसलों सहित कई कृषि प्रणालियों में उपयोग किया जा सकता है.
आईसीएआर–आईआईओआर अब इस तकनीक को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने के लिए सार्वजनिक और निजी बीज कंपनियों, राज्य बीज विकास निगमों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और बीज प्रसंस्करण इकाइयों के साथ साझेदारी को बढ़ावा दे रहा है. संस्थान का मानना है कि स्मार्ट सीड तकनीक के व्यापक उपयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु जोखिम कम करने और किसानों की आय में सुधार लाने में मदद मिल सकती है.