लाखों लोगों पर भुखमरी का संकट बढ़ा, यूएन ने अल नीनो स्थितियों से खाद्य असुरक्षा पर खतरा बताया 

दुनिया के 11 से ज्यादा देशों पर खाद्य पर दबाव आर्थिक झटकों, फंडिंग की भारी कमी और अनुमानित एल नीनो घटना से जुड़े खतरों के चलते और बढ़ गया है. वहीं, इन देशों में असमान बारिश, सूखा और बाढ़ आने की उम्मीद है.

Kisan India
नोएडा | Published: 18 Jun, 2026 | 04:56 PM

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFPने दुनिया के कई क्षेत्रों में भोजन की गंभीर कमी को लेकर चेतावनी जारी की है. एफएओ और डब्ल्यूएफपी ने कहा है कि जून और नवंबर 2026 के बीच ‘भुखमरी के हॉटस्पॉट’ माने जाने 13 देशों में लाखों लोगों के लिए गंभीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति और अधिक खराब होने की आशंका है.

हंगर हॉटस्पॉट्स रिपोर्ट में कई देशों की चिंताजनक हालत

खाद्य संकट के खिलाफ वैश्विक नेटवर्क (जीएनएएफसी) के जरिए साल में दो बार जारी होने वाली हंगर हॉटस्पॉट्स रिपोर्ट के लेटेस्ट एडिशन में, सूडान, साउथ सूडान, यमन और फिलिस्तीन को भूख की गंभीरता और उसके बड़े पैमाने के मामले में दुनिया के सबसे गंभीर भुखमरी के हॉटस्पॉट के तौर पर पहचाना गया है. रिपोर्ट में नाइजीरिया को सबसे अधिक चिंता वाले देशों की सूची में शामिल किया गया है.

खाद्य असुरक्षा की विनाशकारी स्थिति बनने की चेतावनी

आईएएनएस ने हंगर हॉटस्पॉट्स रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि बोर्नो राज्य के कुछ इलाकों में लोगों को आने वाले समय में खाद्य असुरक्षा के विनाशकारी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. इस स्थिति में भुखमरी, मौत, अत्यधिक गरीबी और गंभीर कुपोषण जैसी समस्याएं स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकती हैं. खाद्य उपलब्धता बढ़ाने पर जोर देने को कहा है.

इन वजहों से खाद्य असुरक्षा का बढ़ा खतरा

सोमालिया भी इसी श्रेणी में है. सोमालिया के खाड़ी क्षेत्र के बुरहाकाबा जिले की आबादी अकाल के गंभीर खतरे का सामना कर रही है. इन इलाकों में लड़ाई और हिंसा, खाने की गंभीर कमी की मुख्य वजह बनी हुई हैं, जिससे 13 में से 12 हॉटस्पॉट पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. ये दबाव आर्थिक झटकों, फंडिंग की भारी कमी और अनुमानित एल नीनो घटना से जुड़े बढ़ते खतरों से और बढ़ गए हैं. इसकी वजह से पहले से ही ज्यादा खतरे वाले देशों में असमान बारिश, सूखा और बाढ़ आने की उम्मीद है.

खाद्य असुरक्षा का सामना करने वालों की संख्या बढ़ी

वर्ष 2022 से 2025 के बीच संकटग्रस्त क्षेत्रों में खाद्य सहायता, आपातकालीन कृषि सहयोग और पोषण संबंधी राहत के लिए मिलने वाले वित्तपोषण (फंडिंग) में लगभग 59 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है. इसके चलते वित्तीय सहायता का स्तर घटकर करीब एक दशक पुराने स्तर पर पहुंच गया है. इन सब कारणों से प्रभावित देशों में गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे लोगों की संख्या बढ़कर लगभग 266 मिलियन हो गई है.

वैश्विक हालात लाखों लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहे

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस तरह के हालात लाखों लोगों के लिए मुश्किलें और भी बढ़ा रहे हैं. इस तरह के हालातों की वजह हाल की कई घटनाएं हैं, जिनमें मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का प्रभाव और पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के कुछ क्षेत्रों में इबोला के प्रकोप जैसी स्थितियां शामिल हैं. इन घटनाओं से लोगों की आजीविका, बाजारों की कार्यप्रणाली और मानवीय सहायता तक पहुंच में और अधिक बाधाएं उत्पन्न होने का खतरा है.

भारत का पड़ोसी म्यांमार और अफगानिस्तान भी सूची में शामिल

‘भुखमरी के हॉटस्पॉट’ के अतिगंभीर श्रेणी में सूडान, दक्षिणी सूडान, यमन, नाइजीरिया, सोमालिया और फिलिस्तीन शामिल हैं. वहीं गंभीर श्रेणी में अफगानिस्तान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और हैती हैं. इसके अलावा म्यांमार, माली और मेडागास्कर पर भी ‘भुखमरी के हॉटस्पॉट’ का खतरा है.

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