न खेत जुताई का झंझट और न ही खाद की जरूरत, केवल खेत में बिखेर दें बीज.. तैयार हो जाएगी फसल

उतेरा फसल विधि एक पारंपरिक और किफायती तरीका है, जिसमें धान की खड़ी फसल में ही रबी फसलों के बीज डाले जाते हैं. इससे समय और लागत की बचत होती है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और उत्पादन में सुधार होता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 13 Oct, 2025 | 02:01 PM

Pulse cultivation: पंजाब, हरियाणा और पश्चमी उत्तर प्रदेश में धान की कटाई शुरू हो गई है, लेकिन बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में फसल पकने के अंतिम चरण में है. यानी कटाई शुरू होने में अभी कम से कम 20 दिन लगेंगे. इसके बाद कि किसान रबी फसल की बुवाई करने की तैयार में लग जाएंगे. ऐसे में किसानों को धान कटाई के बाद रबी बुवाई करने के लिए बहुत कम सयम मिलता है. लेकिन अगर किसान पारंपरिक तरीके से उतरा फसल की बुवाई कर सकते हैं, तो कम लागत में डबल मुनाफा होगा.

दरअसल, उतेरा फसल एक पारंपरिक खेती का तरीका है, जिसमें धान की खड़ी फसल  में ही अगली फसल यानी रबी की फसल के बीज छिड़के जाते हैं. यह बीज धान की कटाई से करीब 10 से 15 दिन पहले खेत में डाले जाते हैं. धान के खेत में उस समय मिट्टी में नमी रहती है, जिसका उपयोग बीज के अंकुरण (उगने) के लिए किया जाता है. जब तक धान की फसल  काटी जाती है, तब तक ये बीज अंकुरित होकर उगने लगते हैं और खेत में नई फसल तैयार होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

इन फसलों की करेंगे खेती

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, उतेरा विधि से किसान धान की खड़ी फसल में दलहनी और तिलहनी फसलें उगा सकते हैं. इसके अलावा किसान तिल, उड़द, मूंग, ग्वार, अलसी जैसी दूसरी फसलें भी इस तकनीक से बो सकते हैं. इन फसलों को बोने के लिए खेत की जुताई या ज्यादा तैयारी की जरूरत नहीं होती, बस सही समय पर बीज का छिड़काव करना होता है.

बढ़ जाएगी खेत की उर्वरा शक्ति

उतेरा फसल तकनीक अपनाने से किसान अपने खेत की उर्वरा शक्ति (fertility) को बढ़ा सकते हैं. दरअसल, धान एक अनाज वाली फसल है. जबकि उतेरा विधि में बोई जाने वाली दलहनी फसलों में राइजोबियम नामक जीवाणु पाया जाता है. यह जीवाणु वातावरण से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में मिलाता है, जिससे मिट्टी ज्यादा उपजाऊ बनती है. इससे खेत में फसल विविधता आती है और मिट्टी की गुणवत्ता  सुधरती है.

उतेरा विधि से खेती के फायदे

उतेरा विधि खासतौर पर उन क्षेत्रों में बहुत उपयोगी है जहां सिंचाई के साधन सीमित हैं. इस तकनीक से मिट्टी का क्षरण (erosion) कम होता है और फसलों की उत्पादकता बेहतर होती है. साथ ही खेती की लागत भी घटती है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है. इस तरह उतेरा विधि एक सरल, सस्ती और टिकाऊ खेती का तरीका है, जो कम संसाधनों में भी अच्छे परिणाम दे सकती है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 13 Oct, 2025 | 01:53 PM

लेटेस्ट न्यूज़

India Targets 30 Billion Dollar Seafood Exports In Next Five Years Piyush Goyal Roadmap

भारत का बड़ा लक्ष्य, अगले 5 साल में 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है सीफूड निर्यात, पीयूष गोयल ने रखा रोडमैप

Oil India Discovers Natural Gas Deposit In Andaman Basin Hardeep Puri Calls It Major Energy Breakthrough

ऑयल इंडिया लिमिटेड को अंडमान में मिला प्राकृतिक गैस का बड़ा भंडार, भारत की ऊर्जा ताकत को मिलेगा नया बूस्ट

Weather Update Today Heavy Rain Strong Winds Alert In Delhi Uttar Pradesh Punjab Imd Forecast

आंधी, बारिश और तेज हवाओं का डबल अटैक! दिल्ली-यूपी समेत कई राज्यों में 2 दिन आंधी-तूफान का अलर्ट

6th June 2026 Saturday Agriculture News Live Updates Pm Kisan Yojana Weather Updates Pm Fasal Bima Yojana Krishi Samachar Farmers Schemes Aaj Ki Latest News

LIVE दिल्ली में आज ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का प्रदर्शन! शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की उठेगी मांग

Flood Resistant Paddy Varieties For High Yield In Waterlogged Fields

खेत में कितना भी बढ़े पानी, धान की ये खास किस्में किसानों को दिला सकती हैं शानदार पैदावार

Pm Kisan Yojana 23rd Installment Payment Release Update Details Beneficiaries List

PM किसान की 23वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट! जून में आ सकता है पैसा, किसानों में बढ़ी उम्मीद