पंजाब में पराली जलाने वालों पर सख्त एक्शन, एक ही दिन में 95 FIR दर्ज.. जानें आगे की तैयारी

पंजाब में पराली जलाने पर सख्ती बढ़ गई है. अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने एक दिन में 95 एफआईआर दर्ज की हैं. सैटेलाइट निगरानी से मामलों की पहचान की जा रही है. यह समस्या प्रदूषण बढ़ा रही है और मिट्टी की उर्वरता व लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है.

Kisan India
नोएडा | Published: 13 May, 2026 | 02:02 PM

Punjab News: पंजाब में पराली जलाने के मामले कम होने के नाम नहीं ले रहे हैं. ऐसे में प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने पराली जलाने के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में 95 एफआईआर दर्ज की हैं. ये मामले जिले के अलग-अलग इलाकों में फसल अवशेष जलाने के आरोप में दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने यह कार्रवाई सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर की, जिनमें कई गांवों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आईं. ज्यादातर मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जबकि तीन मामलों में चार लोगों के नाम भी दर्ज किए गए हैं.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, वरपाल गांव के निवासी सुखदेव सिंह और गुरविंदर सिंह के खिलाफ छत्तीविंड पुलिस स्टेशन ने मामला दर्ज किया है. वहीं, मजीठा के रहने वाले हरपाल सिंह और कुलवंत सिंह के खिलाफ मजीठा पुलिस ने अलग-अलग एफआईआर दर्ज  की हैं. थानों के हिसाब से देखें तो छत्तीविंड पुलिस स्टेशन में सबसे ज्यादा 18 मामले दर्ज हुए हैं. इसके बाद अजनाला पुलिस स्टेशन में 15 मामले दर्ज किए गए. झंडेर, ब्यास और मत्तेवाल पुलिस स्टेशनों में 10-10 एफआईआर दर्ज हुई हैं.

मेहता पुलिस स्टेशनों में 5-5 मामले दर्ज किए गए

कंबोह पुलिस स्टेशन में 7 मामले, रामदास और मेहता पुलिस स्टेशनों में 5-5 मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं, राजासांसी में 4, जंडियाला और खलचियां में 3-3 और कथुनंगल तथा मजीठा पुलिस स्टेशनों में 2-2 एफआईआर दर्ज की गई हैं. सरकार और जिला प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान, जुर्माना और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनों पर सब्सिडी देने के बावजूद पंजाब में पराली जलाने की समस्या अभी भी बनी हुई है.

पर्यावरण एजेंसियों और अदालतों ने चिंता जताई

किसान अक्सर अगली फसल की बुवाई से पहले धान की पराली को जल्दी निपटाने के लिए इसे जला देते हैं. लेकिन इससे फसल कटाई के समय वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है और साथ ही मिट्टी की उर्वरता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. हर साल पराली जलाने की घटनाओं से पंजाब और आसपास के राज्यों में प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ जाता है, जिस पर पर्यावरण एजेंसियों और अदालतों ने चिंता जताई है.

दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है

विशेषज्ञों का कहना है कि फसल अवशेष जलाने से हवा में हानिकारक गैसें और महीन धूलकण (पार्टिकुलेट मैटर) फैलते हैं. इसके साथ ही यह मिट्टी में मौजूद फायदेमंद सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे जमीन की गुणवत्ता प्रभावित होती है. अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी सोहैल कासिम मीर ने बताया कि जिन खेतों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, उनके मालिकों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है. उन्होंने कहा कि प्रशासन सैटेलाइट निगरानी और जमीन पर की जा रही जांच के जरिए नियमों के उल्लंघन की पहचान कर रहा है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 13 May, 2026 | 02:02 PM
ज्ञान का सम्मान क्विज

मध्य प्रदेश के किस वैरायटी के गेहूं को जीआई टैग मिला है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
धान (चावल)
विजेताओं के नाम
संजीव कुमार, रेवाड़ी, हरियाणा

लेटेस्ट न्यूज़