मजबूत अल नीनो खेती के लिए बना खतरा, ICICI ने खरीफ उत्पादन और क्वालिटी पर चिंता जताई
El Nino Impact on Kharif production : मजबूत हो रही अल नीनो की स्थिति और हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) के तटस्थ स्थिति में लौटने से मॉनसून के कमजोर रहने का खतरा बढ़ गया है. यह स्थिति भारत में कृषि क्षेत्र के लिए चिंताजनक मानी जा रही है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग, विश्व मौसम संस्थान (WMO) के बाद अब ICICI बैंक ने अपनी मॉनसून रिपोर्ट में अल नीनो को कृषि के लिए चिताजनक बताया है. मजबूत हो रही अल नीनो की स्थिति और हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) के तटस्थ स्थिति में लौटने से मॉनसून के कमजोर रहने का खतरा बढ़ गया है. ICICI बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में देशभर में बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 फीसदी से भी कम रह सकती है, जिसका असर नवंबर तक दिखाई देता रहेगा. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है. ICICI ने खरीफ फसलों का उत्पादन और क्वालिटी बुरी तरह प्रभावित होने का खतरा बताया है. खासकर देश के सूखा स्थिति वाले इलाकों के लिए स्थिति काफी चिंताजनक हो सकती है.
ICICI बैंक की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में मॉनसून पहले ही कमजोर रहा और देश में सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई. इसके चलते अगस्त के अंत तक मॉनसूनी बारिश की कमी बढ़कर करीब 14 फीसदी हो गई. अब सितंबर में भी बारिश का प्रदर्शन चिंता बढ़ा सकता है, क्योंकि अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है, जबकि IOD का सकारात्मक समर्थन कमजोर पड़कर तटस्थ स्थिति में पहुंच गया है.
अल नीनो के मजबूत होने से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट में जुलाई से सितंबर के दौरान मजबूत से बेहद मजबूत अल नीनो बनने की संभावना करीब 99 फीसदी बताई गई है. इनमें बेहद मजबूत अल नीनो की संभावना करीब 75 फीसदी है. वहीं, सितंबर से नवंबर के दौरान बेहद मजबूत अल नीनो की संभावना लगभग 100 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. अगस्त में अल नीनो सूचकांक बढ़कर 2.45 हो गया, जो 0.8 की सीमा से काफी ऊपर है. दूसरी ओर IOD सूचकांक कमजोर होकर करीब 0.22 पर आ गया और तटस्थ क्षेत्र में लौट गया. ऐसे में अल नीनो की मजबूती और IOD के कमजोर समर्थन को मॉनसून के बाकी सीजन के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
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पहले खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित, अब उत्पादन पर खतरा
कमजोर मॉनसून का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी देखा गया है और अब अगस्त के साथ सितंबर में भी कम बारिश से उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है. 28 अगस्त तक करीब 10.71 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी. यह पिछले साल की समान अवधि के 10.9 करोड़ हेक्टेयर से करीब 2 फीसदी कम है. फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो धान की बुवाई का रकबा सालाना आधार पर 3.4 फीसदी, मोटे अनाज का 2.3 फीसदी और तिलहन का रकबा 0.5 फीसदी घटा है. हालांकि, दलहन की बुवाई में करीब 1.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सितंबर में कम बारिश और नवंबर तक अल नीनो का असर बने रहने से उत्पादन और क्वालिटी प्रभावित होने की आशंका है.
जलाशयों में भी पिछले साल से कम पानी
देश के 150 प्रमुख जलाशयों में 27 अगस्त तक कुल क्षमता का 68 फीसदी पानी उपलब्ध था. पिछले साल इसी समय इन जलाशयों में 74 फीसदी भंडारण था. यानी इस साल जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम है. हालांकि, ICICI बैंक को उम्मीद है कि सितंबर में बारिश में सुधार होने पर जलाशयों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हो सकती है. कमजोर मॉनसून की चिंताओं के बावजूद ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फिलहाल मांग मजबूत बनी हुई है. ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री में तेजी देखी गई है. इसके अलावा जुलाई में कृषि ऋण में सालाना आधार पर 17 फीसदी की वृद्धि हुई, जिससे ग्रामीण मांग को सहारा मिल रहा है.
खेती के लिए सूखा और ज्यादा गर्मी बनेगी मुश्किल – WMO
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा है कि भूमध्यरेखा के निकट प्रशांत महासागर में बनी अल नीनो की मौजूदा स्थिति आने वाले महीनों में बहुत मजबूत हो सकती है और फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है. डब्ल्यूएमओ ने कहा कि इसका बारिश और तापमान पर बड़ा असर पड़ सकता है और बाढ़, सूखे तथा अत्यधिक गर्मी का खतरा बढ़ सकता है.