जायद फसलों का बढ़ा रकबा, दलहन- तिलहन में किसानों ने दिखाई रुचि.. धान का घटा क्षेत्रफल

तिलहन का क्षेत्र भी बढ़कर 9.14 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पहले 7.65 लाख हेक्टेयर था. मोटे अनाज की बुवाई भी बढ़कर 13.81 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह 12.70 लाख हेक्टेयर थी. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जायद सीजन में मूंग (ग्रीन ग्राम) और उड़द (ब्लैक ग्राम) की बुवाई में बदलाव देखने को मिला है.

नोएडा | Updated On: 20 Apr, 2026 | 10:06 PM

जायद फसलों के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. किसानों ने दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती में रुचि दिखाई है. इनके रकबे में इजाफा हुआ है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जायद फसलों का कुल रकबाल थोड़ा बढ़कर 69.06 लाख हेक्टेयर हो गया है. खास बात यह है कि पिछले साल इसी अवधि में जायद फसलें करीब 66.14 लाख हेक्टेयर में बोई गई थीं. धान की बात करें तो इस साल 17 अप्रैल तक इसकी बुवाई 30.64 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 32.31 लाख हेक्टेयर था.

इस मौसम में धान की खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक और ओडिशा में की जाती है. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों में कम अवधि वाली दालें जैसे मूंग और उड़द तथा कुछ तिलहन फसलें भी उगाई जाती हैं. ऐसे इस साल दालों का क्षेत्रफल 15.47 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह 13.49 लाख हेक्टेयर था. कुल मिलाकर कुछ फसलों में गिरावट और कुछ में बढ़ोतरी के साथ जायद सीजन में बुवाई का रुझान मिला-जुला रहा है.

जायद फसलों का क्षेत्रफल (लाख हेक्टेयर में) है

क्रम संख्या फसल सामान्य गर्मी क्षेत्र (DES) 2025 अंतिम क्षेत्र 2026 वर्तमान वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में बदलाव
1 चावल (धान) 31.49 33.28 30.64 -1.66
2 दालें 23.40 27.07 15.47 1.99
3 मूंग 20.44 23.49 11.73 1.04
4 उड़द 2.96 3.58 3.45 0.83
5 अन्य दालें 0.00 0.30 0.11
6 मोटे अनाज (श्री अन्न) 12.08 14.06 13.81 1.10
7 ज्वार 0.34 0.36 0.37 0.01

9.14 लाख हेक्टेयर में तिलहन बुवाई

इसी तरह तिलहन का क्षेत्र भी बढ़कर 9.14 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पहले 7.65 लाख हेक्टेयर था. मोटे अनाज की बुवाई भी बढ़कर 13.81 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह 12.70 लाख हेक्टेयर थी. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जायद सीजन में मूंग (ग्रीन ग्राम) और उड़द (ब्लैक ग्राम) की बुवाई में बदलाव देखने को मिला है. मूंग की खेती इस साल 11.73 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 10.69 लाख हेक्टेयर थी, यानी इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं उड़द की बुवाई भी बढ़कर 3.45 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल 2.61 लाख हेक्टेयर थी. कुल मिलाकर दोनों दालों की खेती में इस साल हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है.

0.37 लाख हेक्टेयर में ज्वार की खेती

मोटे अनाजों की बात करें तो ज्वार की खेती इस साल 0.37 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल 0.36 लाख हेक्टेयर थी, यानी इसमें हल्की बढ़ोतरी हुई है. बाजरे की बुवाई भी बढ़कर 4.74 लाख हेक्टेयर हो गई है, जबकि पिछले साल यह 4.30 लाख हेक्टेयर थी. वहीं रागी की खेती इस साल घटकर 0.21 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो पिछले साल 0.16 लाख हेक्टेयर थी. कुल मिलाकर कुछ मोटे अनाजों में बढ़ोतरी और कुछ में गिरावट दर्ज की गई है.

सरकार कर रही है प्रोत्साहित

सरकार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है कि वे सर्दियों (रबी) और बारिश (खरीफ) के बीच के लगभग 90 दिनों के खाली समय का उपयोग जायद फसलों की खेती के लिए करें. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सिंचाई की सुविधाएं बढ़ाई जाएं और कुछ राज्यों में आवारा पशुओं की समस्या का समाधान किया जाए, तो जायद फसलों के तहत और ज्यादा क्षेत्र में खेती संभव हो सकती है. भारत में कृषि मुख्य रूप से तीन मौसमों में होती है- रबी, खरीफ और जायद.

Published: 20 Apr, 2026 | 10:03 PM

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