Winter Farming : सर्दी अपने पूरे जोर पर है. रात के समय गिरता तापमान और सुबह खेतों पर जमी सफेद परत किसानों की परेशानी बढ़ा रही है. खासतौर पर सब्जी उगाने वाले किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं पाला उनकी मेहनत पर पानी न फेर दे. लेकिन राहत की बात यह है कि कुछ आसान और सस्ती तकनीकों को अपनाकर कड़ाके की ठंड में भी सब्जियों को सुरक्षित रखा जा सकता है और पैदावार पर असर नहीं पड़ने दिया जा सकता.
ठंड और पाले से क्यों बढ़ जाती है परेशानी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब तापमान तेजी से गिरता है और जमाव बिंदु के करीब पहुंच जाता है, तब सब्जियों की पत्तियां और कोमल तने सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. पाले की वजह से पत्तियां झुलस जाती हैं, पौधों की बढ़वार रुक जाती है और कई बार पूरी फसल खराब हो जाती है. यही कारण है कि इस मौसम में किसानों को फसलों की अतिरिक्त देखभाल करनी पड़ती है, खासकर हरी सब्जियों में नुकसान का खतरा ज्यादा रहता है.
लोटनल और नेट से मिल रही सुरक्षा
किसान अब ठंड से बचाव के लिए लोटनल और जालीनुमा नेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इनसे खेत के ऊपर एक तरह की ढाल बन जाती है, जिससे ठंडी हवा सीधे पौधों पर नहीं पड़ती. दिन में धूप अंदर तक पहुंच जाती है और रात में तापमान बहुत ज्यादा नहीं गिरता. इससे पौधों के आसपास का माहौल अनुकूल बना रहता है और पाले का असर कम हो जाता है.
पॉलीथिन और ड्रिप सिस्टम का फायदा
पॉलीथिन शीट का सही तरीके से इस्तेमाल भी ठंड से बचाव में कारगर साबित हो रहा है. इसे पौधों के आसपास या कतारों के ऊपर लगाया जाता है, जिससे जमीन की गर्मी बाहर नहीं निकलती. वहीं ड्रिप सिस्टम से हल्की सिंचाई करने पर भी फायदा होता है. नमी बनी रहने से तापमान संतुलित रहता है और पाला जमने की संभावना कम हो जाती है. यह तरीका पानी की बचत के साथ-साथ फसल को सुरक्षा भी देता है.
सही समय पर उपाय, तभी होगा पूरा लाभ
ठंड से बचाव के ये उपाय तभी असरदार होते हैं, जब किसान इन्हें समय रहते अपनाएं. जैसे ही तापमान गिरने लगे और पाले की आशंका हो, उसी समय खेतों में तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. साथ ही हल्की सिंचाई, खरपतवार की सफाई और पौधों की नियमित निगरानी जरूरी है. इन छोटे-छोटे कदमों से न सिर्फ फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि पैदावार भी अच्छी मिलती है.