Heat Stress In Vegetables: देश के कई हिस्सों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. इस भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि खेतों में खड़ी सब्जी फसलों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा और करेला जैसी फसलें इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं. तेज धूप और लू के कारण फसलों में ‘हीट स्ट्रेस’ की समस्या बढ़ती जा रही है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है. इसी को लेकर उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है.
क्या होता है हीट स्ट्रेस?
जब तापमान सामान्य सीमा से काफी ज्यादा बढ़ जाता है और मिट्टी में पर्याप्त नमी व पोषक तत्व नहीं रहते, तो पौधे और फसलें हीट स्ट्रेस की स्थिति में आ जाते हैं. इस दौरान पौधों की ग्रोथ धीमी हो जाती है, पत्तियां मुरझाने लगती हैं और फल बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है. लगातार तेज धूप और लू की वजह से पौधों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे फसल की क्वालिटी और उत्पादन दोनों घट जाते हैं.
क्यों बढ़ रही है समस्या?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हीट स्ट्रेस के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. इनमें 40 डिग्री से अधिक तापमान, मिट्टी में नमी की कमी, असंतुलित पोषण, तेज धूप और अनियमित सिंचाई प्रमुख हैं. इन परिस्थितियों में पौधे पानी और पोषक तत्वों को सही तरीके से ग्रहण नहीं कर पाते, जिससे उनका विकास प्रभावित होता है.
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भीषण #गर्मी और #हीट_स्ट्रेस से सब्जियों को बचाने के लिए नियमित हल्की #सिंचाई (सुबह/शाम), #मल्चिंग (पराली या प्लास्टिक) का उपयोग, और #ग्रीन_नेट (शेड नेट) लगाना सबसे प्रभावी उपाय हैं। #कैल्शियम_नाइट्रेट और #माइकोराइजा का उपयोग करके भी पौधों को #स्ट्रेस से बचाया जा सकता है@UPGovt pic.twitter.com/f2QxO0NR39
— Krishi Vibhag Gov UP (@jdabureau) May 14, 2026
कौन सी फसलें ज्यादा प्रभावित हैं?
इस समय सबसे अधिक नुकसान इन सब्जियों में देखा जा रहा है:
- टमाटर
- मिर्च
- बैंगन
- खीरा
- करेला
इसके अलावा पत्तेदार और बेल वाली सब्जियां भी गर्मी से बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं. कई किसानों की शिकायत है कि फल समय से पहले गिर रहे हैं और पौधे पीले पड़ने लगे हैं.
हीट स्ट्रेस से बचाव के प्रभावी उपाय
- सही समय पर सिंचाई करें: सुबह या शाम के समय हल्की सिंचाई करना सबसे बेहतर रहता है. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों पर गर्मी का असर कम होता है. दोपहर में सिंचाई से बचना चाहिए.
- मल्चिंग का उपयोग करें: पराली, सूखी घास या प्लास्टिक मल्च का उपयोग करने से मिट्टी की नमी सुरक्षित रहती है और जमीन का तापमान नियंत्रित रहता है. इससे पानी की जरूरत भी कम हो जाती है.
- शेड नेट का प्रयोग: 25 से 50 फीसदी शेड नेट लगाने से तेज धूप सीधे पौधों पर नहीं पड़ती. इससे पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और गर्मी का प्रभाव कम होता है.
- संतुलित पोषण दें: फसलों में NPK के साथ जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें. इसके साथ समुद्री शैवाल, अमीनो एसिड, पोटाश और कैल्शियम नाइट्रेट का फोलियर स्प्रे भी फायदेमंद होता है.
- माइकोराइजा का उपयोग: माइकोराइजा जैसे जैविक तत्व पौधों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं और पानी व पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करते हैं. इससे पौधों की गर्मी सहने की क्षमता बढ़ती है.
सही समय पर सिंचाई, संतुलित पोषण और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करके किसान हीट स्ट्रेस के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं. इससे न केवल फसल की गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि उत्पादन भी बेहतर होता है.