किसानों के बीच तोरई की नई किस्म की धूम.. 60 दिन में भर देगी जेब! सस्ते में यहां से खरीदें बीज

Ridge Gourd Farming: जायद सीजन में ‘काशी रक्षिता’ तोरई की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला बेहतरीन विकल्प है. यह किस्म 50-60 दिनों में तैयार हो जाती है, गर्मी में अच्छी पैदावार देती है और बीमारियों के प्रति सहनशील है, जिससे किसान जल्दी कमाई कर सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 15 Apr, 2026 | 07:25 PM

Turai Ki Kheti: रबी और खरीफ फसलों के बीच आने वाला समय, यानी मार्च से जून तक का दौर, जायद सीजन कहलाता है. इस समय तापमान अधिक होता है, इसलिए ऐसी फसलें बोई जाती हैं जो गर्मी सहन कर सकें और कम समय में तैयार हो जाएं. यही वजह है कि इस सीजन में नकदी फसलों की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनती है.

तोरई की खेती: कम समय में तगड़ी कमाई

जायद सीजन में तोरई की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रही है. खासतौर पर ‘काशी रक्षिता’ किस्म की तोरई कम लागत में ज्यादा उत्पादन देने के लिए जानी जाती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह किस्म गर्मी के मौसम के हिसाब से विकसित की गई है, जिससे फसल जल्दी तैयार होती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.

‘काशी रक्षिता’ की खासियत क्या है?

‘काशी रक्षिता’ तोरई की एक उन्नत किस्म है, जिसे अधिक पैदावार और रोगों के प्रति सहनशीलता के लिए तैयार किया गया है. यह किस्म लगभग 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है, यानी किसान बहुत कम समय में अपनी फसल बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गर्मी के मौसम में भी अच्छी तरह बढ़ती है और फसल का नुकसान कम होता है.

बीज कहां और कितने में मिलेंगे?

इस किस्म के बीज नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) के ऑनलाइन स्टोर पर आसानी से उपलब्ध हैं. किसान घर बैठे ही इन बीजों को मंगवा सकते हैं. इसकी कीमत भी काफी किफायती है सिर्फ 60 रुपये में 10 ग्राम बीज मिल जाते हैं. इससे छोटे किसान भी कम निवेश में खेती शुरू कर सकते हैं.

खेती के लिए सही मिट्टी और तैयारी

तोरई की अच्छी फसल के लिए जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए. बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करें और उसमें गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं, ताकि मिट्टी की उर्वरता बढ़े और पौधों की अच्छी बढ़वार हो सके. तोरई की फसल को अच्छी तरह बढ़ाने के लिए समय-समय पर सिंचाई करना जरूरी है. इसके अलावा, खेत में निराई-गुड़ाई करते रहें ताकि खरपतवार न पनपे. पौधों को सहारा देने के लिए मचान बनाना भी जरूरी होता है, जिससे बेल आसानी से फैल सके और फल अच्छी क्वालिटी के मिलें.

जल्दी तैयार, जल्दी मुनाफा

‘काशी रक्षिता’ तोरई की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह मात्र 50-60 दिनों में तैयार हो जाती है. यानी किसान कम समय में फसल बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है, जिससे बिक्री में कोई दिक्कत नहीं आती. दिलचस्प बात यह है कि इस किस्म की तोरई को सिर्फ खेतों में ही नहीं, बल्कि घर की छत या गार्डन में भी आसानी से उगाया जा सकता है. बागवानी के शौकीन लोग भी कम जगह में इसे उगाकर ताजी और ऑर्गेनिक सब्जी का आनंद ले सकते हैं.

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Published: 15 Apr, 2026 | 07:25 PM
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