खरीफ से पहले सरकार की बड़ी पहल, सब्सिडी पर मिलेगा बीज, 4 लाख मिनीकिट तैयार

UP Seed Subsidy: खरीफ सीजन से पहले सरकार ने किसानों के लिए बड़ी राहत योजना शुरू की है, जिसके तहत 50 फीसदी सब्सिडी पर बीज मिनीकिट दिए जा रहे हैं. इस योजना में करीब 45,000 क्विंटल ढैंचा बीज के साथ मक्का, उड़द, मूंग, ग्वार और ज्वार जैसे फसलों के बीज भी शामिल हैं. इन बीजों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, रासायनिक खाद की जरूरत कम होगी और फसल उत्पादन बेहतर होगा.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 19 Apr, 2026 | 12:16 PM

Seed Subsidy: उत्तर प्रदेश में किसानों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने खरीफ सीजन से पहले एक अहम पहल शुरू की है. खेती की बढ़ती लागत को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने बड़े स्तर पर बीज वितरण योजना लागू की है. इस योजना के तहत किसानों को गुणवत्तापूर्ण और उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे फसल की पैदावार बेहतर हो सके. साथ ही, सब्सिडी के जरिए बीज सस्ती दरों पर मिलेंगे, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को खास फायदा होगा और वे भी आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा सकेंगे.

45,000 क्विंटल ढैंचा बीज का वितरण

कृषि विभाग ने खरीफ सीजन के लिए करीब 45,000 क्विंटल ढैंचा (Dhaincha) बीज वितरित करने का लक्ष्य तय किया है. ढैंचा एक हरी खाद (Green Manure) फसल है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में बेहद उपयोगी होती है. इससे जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है.

50 फीसदी अनुदान पर मिलेगा मिनीकिट

उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को राहत देने के लिए 20,000 क्विंटल बीज से लगभग 4 लाख मिनीकिट तैयार कर रही है. इन मिनीकिट्स को किसानों को 50 फीसदी अनुदान (सब्सिडी) पर उपलब्ध कराया जाएगा. इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी आसानी से उन्नत बीज मिल सकेंगे और उनकी लागत कम होगी.

मिनीकिट में क्या-क्या मिलेगा?

हर मिनीकिट को इस तरह तैयार किया गया है कि किसानों को एक ही पैकेज में कई फसलों के बीज मिल सकें. इसमें शामिल होंगे:

  • 1-1 किलो ढैंचा, मक्का और उड़द
  • 500-500 ग्राम ग्वार, मूंग, लोबिया और ज्वार के बीज

यह विविधता किसानों को फसल चक्र अपनाने में मदद करेगी और मिट्टी की सेहत भी बेहतर बनाएगी.

मिट्टी की सेहत और उत्पादन दोनों में फायदा

ढैंचा जैसी फसलें न केवल मिट्टी को पोषक तत्वों से भरती हैं, बल्कि अगली फसल के लिए जमीन को तैयार भी करती हैं. इससे पैदावार में सुधार होता है और खेती की गुणवत्ता बढ़ती है. साथ ही, रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम होने से लागत भी घटती है.

यह योजना सिर्फ बीज वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है. जब किसान बेहतर गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग करेंगे, तो उनकी फसल अच्छी होगी और बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी.

सहायता और जानकारी के लिए

किसान इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग की हेल्पलाइन 0522-2317003 पर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा स्थानीय कृषि कार्यालयों से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है. सरकार की यह पहल किसानों के लिए एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल उनकी लागत घटाएगी बल्कि उत्पादन और आय दोनों बढ़ाने में मदद करेगी. खरीफ सीजन से पहले इस तरह की योजनाएं किसानों को मजबूत बनाती हैं और खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाती हैं.

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Published: 19 Apr, 2026 | 12:14 PM
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