MSP गारंटी कानून, व्यास नदी जल विवाद समेत किसानों के मुद्दों को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन देने पहुंचे किसानों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया. पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछारें छोड़ीं. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में जुटे किसानों का आज पहले से मार्च प्रस्तावित था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया. बाद में जब वह राज्यपाल को ज्ञापन देने जाने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सख्ती दिखाई तो झड़प हो गई. पुलिस ने कई किसानों को हिरासत में ले लिया है. जबकि, एसकेएम ने कई किसानों के घायल होने की बात कही है.
पूरे पंजाब से बड़ी संख्या में किसान संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले लोक भवन की ओर मार्च करने के लिए मोहाली में इकट्ठा हुए. पीटीआई के अनुसार जब किसान मोहाली-चंडीगढ़ सीमा बिंदु के पास पहुंचे और बैरिकेड्स कूदकर पार करने लगे, तो पुलिस ने उन्हें मोहाली सीमा पर रोकने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. यहां पर किसानों ने MSP के लिए कानूनी गारंटी, नदी जल विवाद के समाधान और पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के कुछ प्रावधानों को रद्द करने की मांग की.
पुलिस ने कई किसानों को हिरासत में लिया
पुलिस ने कई किसानों को हिरासत में ले लिया है. किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां सहित संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के कुछ नेताओं ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई में कुछ किसान घायल हो गए. किसान नेताओं ने कहा कि पुलिस प्रशासन की यह दमनकारी और किसान विरोधी नीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी. एसकेएम ने कहा कि किसानों के हक नहीं दिए गए तो बड़ा आंदोलन होगा.
पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया- जगतार सिंह
भारतीय किसान यूनियन उग्राहां के नेता जगतार सिंह ने किसान इंडिया को बताया कि भाखड़ा बांध मैनेजमेंट बोर्ड मनमाने तरीके से पंजाब के किसानों को पानी न देकर हिमाचल और राजस्थान को दिया जा रहा है. इसके खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चंडीगढ़ में राज्यपाल को ज्ञापन देने और शांतिपूर्ण मार्च होना था, जिसे मोहाली और चंडीगढ़ सीमा पर पुलिस ने रोक दिया और किसानों पर लाठीचार्ज किया. पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार किसानों पर छोड़ी है.
कई किसानों को चोटें आईं
किसान नेता ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई में कई किसानों को चोटें आई हैं और सैंकड़ों की संख्या में किसानों को हिरासत में लिया गया है. किसान नेता जगतार सिंह ने कहा कि मामले में पुलिस प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत चल रही है. अगर किसानों को नहीं छोड़ा जाता है और सुनवाई नहीं की जाती है तो संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल सभी किसान दलों के साथ बैठक करके आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा.
नदी जल मुद्दे पर बिफरे किसान
किसानों ने मांग की कि व्यास नदी जल के मुद्दे को नदी-घाटी सिद्धांत के अनुसार हल किया जाना चाहिए, क्योंकि पंजाब वह राज्य है जिससे होकर नदी बहती है और इसलिए उस पर पहला अधिकार पंजाब का होना चाहिए. उन्होंने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 78, 79 और 80 को रद्द करने की मांग की, क्योंकि ये धाराएं पंजाब के जल का नियंत्रण केंद्र सरकार के हाथों में सौंपती हैं.
जल और बांध अधिनियम रद्द करने की मांग
किसानों ने ‘बांध सुरक्षा अधिनियम’ और ‘जल संशोधन अधिनियम 2024’ को रद्द करने की मांग की है. यह दावा करते हुए कि ये अधिनियम राज्यों के जल अधिकारों का उल्लंघन करते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार, बोर्ड के नियमों में संशोधन करके, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में पंजाब की स्थायी सदस्यता को समाप्त करने की कोशिश कर रही है. इसके साथ ही केंद्र सरकार से अमेरिका के साथ कृषि विरोधी मुक्त व्यापार समझौते में शामिल होने के अपने फैसले को रद्द करने का आग्रह किया.