Report: मक्का किसानों की बढ़ी चिंता! कमजोर मॉनसून से उत्पादन में 50 लाख टन गिरावट का अनुमान

Maize Production India: कमजोर मॉनसून और मक्के की कम बुवाई ने 2026-27 के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है. USDA ने भारत के मक्का उत्पादन अनुमान में करीब 10 फीसदी कटौती कर इसे 5 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया है. पिछले साल उत्पादन 5.5 करोड़ टन था.

नोएडा | Updated On: 1 Sep, 2026 | 07:25 PM

Maize Production 2026: कमजोर मॉनसून का असर अब खरीफ फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है. मक्के की खेती को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. अमेरिका कृषि विभाग (USDA) ने भारत में 2026-27 के मक्का उत्पादन के अपने अनुमान में करीब 10 प्रतिशत की कटौती की है. नए अनुमान के मुताबिक इस सीजन भारत में मक्के का उत्पादन करीब 5 करोड़ टन रह सकता है. अगर यह अनुमान सही रहता है तो पिछले साल के मुकाबले करीब 50 लाख टन की कमी हो सकती है. कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार 2025-26 में भारत में मक्के का उत्पादन करीब 5.5 करोड़ टन रहा था.

इससे पहले के साल की तुलना में इसमें करीब 27 प्रतिशत की अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. ऐसे में उत्पादन में अनुमानित गिरावट किसानों और मक्का आधारित उद्योगों दोनों के लिए चिंता बढ़ा सकती है.

मक्के की बुवाई का रकबा भी घटा

मक्का उत्पादन घटने की एक बड़ी वजह इसकी बुवाई का कम होना भी है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 28 अगस्त तक देश में करीब 89.99 लाख हेक्टेयर में मक्का बोया गया है. पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 93.87 लाख हेक्टेयर था. यानी इस बार मक्के की बुवाई करीब 4 प्रतिशत कम हुई है. रकबे में कमी के साथ अगर फसल की उपज पर भी मौसम का असर पड़ा तो कुल उत्पादन में और गिरावट आ सकती है.

बारिश की कमी बनी सबसे बड़ी चिंता

जानकारों के मुताबिक सिर्फ बुवाई का रकबा कम होना ही चिंता की वजह नहीं है. कमजोर बारिश ने खेतों में खड़ी मक्के की फसल के लिए भी मुश्किल बढ़ा दी है. USDA की रिपोर्ट के अनुसार जून में कमजोर मॉनसून के कारण कई इलाकों में मक्के की बुवाई करीब दो सप्ताह तक पीछे चली गई. प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी से खेतों में मिट्टी की नमी भी प्रभावित हुई है. अगर आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो फसल की बढ़वार और पैदावार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.

कर्नाटक और महाराष्ट्र में रकबा घटा

देश के कई बड़े मक्का उगाने वाले राज्यों में इस साल मक्के की खेती का रकबा कम हुआ है. कर्नाटक में खरीफ मक्के का रकबा करीब 26 फीसदी घटकर 12.58 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल यह 17 लाख हेक्टेयर था. महाराष्ट्र में भी मक्के की खेती का रकबा 11 फीसदी घटकर 12.9 लाख हेक्टेयर रह गया है. पिछले साल यह 14.52 लाख हेक्टेयर था. मध्य प्रदेश में करीब 2.22 फीसदी की कमी के साथ रकबा 26.4 लाख हेक्टेयर रहा. वहीं, तेलंगाना में मक्के की बुवाई 13 फीसदी घटकर 2.3 लाख हेक्टेयर रह गई है.

कुछ राज्यों में बढ़ी मक्के की खेती

हालांकि, सभी राज्यों में मक्के की बुवाई कम नहीं हुई है. राजस्थान में मक्के की खेती का रकबा करीब 9.85 फीसदी बढ़कर 9.76 लाख हेक्टेयर हो गया है. गुजरात में भी रकबा 3.59 फीसदी बढ़कर 2.71 लाख हेक्टेयर और हिमाचल प्रदेश में 3.67 फीसदी बढ़कर 2.54 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है. यानी कुछ राज्यों में किसानों ने मक्के की खेती बढ़ाई है. हालांकि, देश के बड़े मक्का उत्पादक राज्यों में रकबा घटने से कुल मक्का उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

उत्पादन घटने के बीच खपत बढ़ने का अनुमान

एक तरफ मक्के के उत्पादन में कमी की आशंका है, तो दूसरी तरफ इसकी मांग बढ़ने का अनुमान है. USDA के स्थानीय कार्यालय के ताजा अनुमान के मुताबिक 2026 में भारत में मक्के की कुल खपत करीब 5.1 करोड़ टन रह सकती है. पिछले साल यह आंकड़ा करीब 4.8 करोड़ टन था. ऐसे में उत्पादन और खपत के बीच अंतर बढ़ने पर मक्के की कीमतों और उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है.

रबी और जायद की फसल पर भी असर का खतरा

मौसम की चुनौती सिर्फ खरीफ मक्के तक सीमित रहने की आशंका नहीं है. अगर अगस्त और सितंबर में बारिश कम रही तो मिट्टी में नमी की कमी आगे रबी और जायद सीजन की मक्का फसल को भी प्रभावित कर सकती है. वहीं सितंबर में खरीफ मक्के की कटाई के दौरान बहुत ज्यादा बारिश या बाढ़ जैसी स्थिति बनने पर भी फसल को नुकसान हो सकता है. इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह मक्का किसानों के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं.

Published: 2 Sep, 2026 | 06:00 AM

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