India urea imports: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब केवल तेल और गैस बाजार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है. इस तनाव के कारण तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. गैस की कमी का सीधा असर उर्वरक उद्योग पर पड़ रहा है, क्योंकि यूरिया जैसे उर्वरकों के उत्पादन में प्राकृतिक गैस मुख्य कच्चा माल होती है.
बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, इसी स्थिति को देखते हुए भारत ने चीन से यूरिया निर्यात की अनुमति देने का अनुरोध किया है. भारत के अधिकारियों ने चीनी अधिकारियों से बातचीत कर कहा है कि वे यूरिया के निर्यात पर लगी पाबंदियों में कुछ ढील देने पर विचार करें, ताकि जरूरत पड़ने पर भारत को अतिरिक्त आपूर्ति मिल सके.
गैस की कमी से उर्वरक उत्पादन पर असर
भारत में कई उर्वरक कारखाने प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं. लेकिन हाल के दिनों में गैस की आपूर्ति कम होने लगी है. बताया जा रहा है कि उर्वरक कंपनियों को अभी उनकी जरूरत की करीब 70 प्रतिशत गैस ही मिल पा रही है. इस वजह से कुछ कंपनियों ने उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है. यदि स्थिति ज्यादा समय तक बनी रहती है तो कुछ उर्वरक संयंत्रों को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ सकता है.
कतर, जो भारत को LNG का बड़ा आपूर्तिकर्ता है, उसने भी हाल ही में गैस की आपूर्ति कम कर दी है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद कई ऊर्जा आपूर्ति मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ रहा है.
चीन से यूरिया निर्यात की उम्मीद
भारत ने चीन से आग्रह किया है कि वह अपने यूरिया निर्यात कोटा में राहत देने पर विचार करे. चीन दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया उत्पादक देश है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी बड़ी भूमिका है. चीन आमतौर पर यूरिया के निर्यात को कोटा प्रणाली के तहत नियंत्रित करता है. पिछले साल उसने कुछ सीमित मात्रा में यूरिया निर्यात की अनुमति दी थी, जिसमें भारत भी शामिल था. हालांकि वर्ष 2026 के लिए अभी तक निर्यात कोटा तय नहीं किया गया है. अगर चीन निर्यात की अनुमति देता है तो भारत को संभावित कमी से निपटने में काफी मदद मिल सकती है.
भारत में यूरिया की बढ़ती मांग
भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ता और आयातकों में शामिल है. देश में उर्वरक का उत्पादन होता है, लेकिन कृषि क्षेत्र की बड़ी जरूरत के कारण आयात भी करना पड़ता है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में अब तक भारत लगभग 9.8 मिलियन टन यूरिया आयात कर चुका है. इसके अलावा अगले तीन महीनों में करीब 1.7 मिलियन टन यूरिया और आने की उम्मीद है. बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही यूरिया आयात के लिए नया अंतरराष्ट्रीय टेंडर भी जारी कर सकती है, ताकि आने वाले खरीफ सीजन से पहले पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया जा सके.
अन्य देशों से भी मिल सकती है आपूर्ति
अगर पश्चिम एशिया में गैस आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो भारत को यूरिया के अन्य स्रोतों की तलाश भी करनी पड़ सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार चीन के अलावा रूस, इंडोनेशिया, मलेशिया और मिस्र जैसे देश भी यूरिया के संभावित आपूर्तिकर्ता हो सकते हैं. सरकार का प्रयास है कि उर्वरकों की आपूर्ति में किसी तरह की कमी न आने दी जाए.
किसानों के लिए क्यों जरूरी है यूरिया
भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में से एक है. देश चावल का बड़ा निर्यातक है और गेहूं, गन्ना, कपास जैसी कई फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करता है. ऐसे में उर्वरकों की समय पर उपलब्धता बेहद जरूरी होती है. यदि उर्वरकों की कमी होती है तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है.
इसी कारण सरकार अभी से स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक आपूर्ति के विकल्प तलाश रही है, ताकि आने वाले बुवाई सीजन में किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो और देश की खाद्य सुरक्षा भी बनी रहे.