खरीफ सीजन में चावल खरीद तेज, 72 प्रतिशत लक्ष्य पूरा…इन राज्यों ने गिरावट के बीच संभाला मोर्चा

चावल का विपणन सीजन आमतौर पर अक्टूबर से शुरू होता है, लेकिन इस साल धान की जल्दी आवक के कारण कई राज्यों में खरीद पहले ही शुरू कर दी गई. केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा में मध्य सितंबर से खरीद की अनुमति दे दी थी, जबकि तमिलनाडु में 1 सितंबर से ही खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई थी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 2 Jan, 2026 | 08:25 AM

Rice procurement: देश में चालू खरीफ विपणन सीजन के शुरुआती तीन महीनों में चावल की सरकारी खरीद ने अच्छी गति दिखाई है. अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच केंद्र सरकार ने 333.72 लाख टन चावल की खरीद की, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 7 प्रतिशत अधिक है. इस तेजी के साथ सरकार अब तक खरीफ सीजन के लिए तय कुल लक्ष्य का लगभग 72 प्रतिशत हासिल कर चुकी है. यह आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब कुछ बड़े पारंपरिक राज्यों में खरीद घटी है, लेकिन कई अन्य राज्यों में अप्रत्याशित बढ़त ने कुल तस्वीर को सकारात्मक बनाए रखा है.

सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 के लिए 463.49 लाख टन चावल खरीद का लक्ष्य तय किया है. तुलना करें तो पूरे 2024-25 सीजन में देशभर से कुल 545.22 लाख टन चावल की सरकारी खरीद हुई थी. शुरुआती महीनों में ही मजबूत खरीद से सार्वजनिक वितरण प्रणाली और केंद्रीय भंडार को लेकर सरकार की स्थिति फिलहाल संतोषजनक मानी जा रही है.

समय से पहले खरीद शुरू होने का असर

चावल का विपणन सीजन आमतौर पर अक्टूबर से शुरू होता है, लेकिन इस साल धान की जल्दी आवक के कारण कई राज्यों में खरीद पहले ही शुरू कर दी गई. केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा में मध्य सितंबर से खरीद की अनुमति दे दी थी, जबकि तमिलनाडु में 1 सितंबर से ही खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई थी. इस फैसले का सीधा असर यह हुआ कि कुछ राज्यों में शुरुआती महीनों में ही खरीद के आंकड़े मजबूत हो गए.

तमिलनाडु में रिकॉर्ड तेजी

तमिलनाडु इस बार चावल खरीद के मामले में सबसे आगे रहा. राज्य में सरकारी खरीद 179 प्रतिशत बढ़कर 10.09 लाख टन तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.62 लाख टन थी. जानकारों के मुताबिक, यह बढ़त एक ओर जहां बेहतर उत्पादन का नतीजा है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार की सक्रियता भी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है. विधानसभा चुनाव वाले साल में किसानों से खरीद को प्राथमिकता दिए जाने का असर साफ दिखाई दे रहा है.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का मजबूत प्रदर्शन

दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी इस बार खरीद में अच्छी तेजी दर्ज की गई. तेलंगाना में चावल खरीद 27.3 प्रतिशत बढ़कर 35.96 लाख टन पहुंच गई, जो पिछले साल 28.25 लाख टन थी. वहीं आंध्र प्रदेश में तो खरीद में जबरदस्त उछाल देखने को मिला. यहां सरकारी खरीद 109.3 प्रतिशत बढ़कर 22.65 लाख टन दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 10.82 लाख टन थी.

पश्चिम बंगाल में अप्रत्याशित उछाल

पश्चिम बंगाल में आमतौर पर अक्टूबर-दिसंबर के दौरान केंद्र सरकार की खरीद बेहद कम या लगभग शून्य रहती थी. लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है. चालू सीजन में अब तक 10.27 लाख टन चावल की खरीद हो चुकी है. जानकार इसे राज्य में चुनावी माहौल और प्रतिस्पर्धी राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जहां किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य दिलाने की कोशिशें तेज हुई हैं.

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सुधार

देश के सबसे बड़े खरीफ उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में शुरुआती दो महीनों में खरीद में गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन बाद में स्थिति सुधरी. अब तक राज्य से 24.45 लाख टन चावल खरीदा गया है, जो पिछले साल के 23.88 लाख टन से 2.4 प्रतिशत अधिक है. मध्य प्रदेश में भी खरीद ने रफ्तार पकड़ी और यहां 35.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ आंकड़ा 22.52 लाख टन पहुंच गया. उत्तराखंड में भी 15.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 5.01 लाख टन की खरीद दर्ज की गई है.

पंजाब और छत्तीसगढ़ में गिरावट चिंता का कारण

दूसरी ओर, केंद्रीय पूल में सबसे बड़ा योगदान देने वाला पंजाब इस बार पीछे नजर आया. राज्य में चावल खरीद 9.7 प्रतिशत घटकर 104.80 लाख टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 116.13 लाख टन थी. हरियाणा में खरीद लगभग स्थिर रही और 35.96 लाख टन दर्ज की गई, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि आंकड़ों में आगे संशोधन हो सकता है, क्योंकि पिछले पूरे सीजन में यहां कुल खरीद 36.17 लाख टन रही थी.

छत्तीसगढ़ में भी खरीद में गिरावट दर्ज की गई. यहां चावल खरीद 16.2 प्रतिशत घटकर 44.26 लाख टन रही, जबकि पिछले साल यह 52.84 लाख टन थी. राज्य में खरीद 1 नवंबर से शुरू हुई थी और 31 जनवरी तक चलनी है, इसलिए आने वाले दिनों में कुछ सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.

आगे की राह और संभावित चुनौतियां

कुल मिलाकर खरीफ सीजन के शुरुआती महीनों में चावल खरीद की तस्वीर मिली-जुली रही है. जहां दक्षिण और पूर्वी राज्यों ने बढ़त दिखाई, वहीं उत्तर और मध्य भारत के कुछ बड़े राज्यों में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है. आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि लक्ष्य को पूरी तरह हासिल करने के लिए केंद्र सरकार किस तरह संतुलन बनाती है और किन राज्यों पर अतिरिक्त ध्यान देती है.

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