Rajasthan News: राजस्थान में सरकारी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं से धन की कथित हेराफेरी का बड़ा नेटवर्क सामने आया है. पुलिस के अनुसार, यह एक समानांतर ‘साइबर सरकार’ की तरह काम कर रहा था, जिसमें एजेंट, ई-मित्र संचालक और कुछ सरकारी कर्मचारी शामिल थे. अब तक इस मामले में 51 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और हजारों संदिग्ध फर्जी लाभार्थियों की पहचान की गई है. जांच अधिकारियों के मुताबिक, कुछ बिचौलियों ने हजारी लाल, दिनेश कुमार, भगवान दास, बीराम लाल और राम दयाल समेत कई लोगों को शामिल कर उनके आधार विवरण का इस्तेमाल किया. इनके जरिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan), राजस्थान सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और राजस्थान डिजास्टर मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (DMIS) जैसी योजनाओं का पैसा गलत तरीके से निकाला गया.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सीकर जिले के राजपुरा निवासी हजारी लाल ने कहा कि करीब दो साल पहले एक 15 वर्षीय लड़के ने उनसे किसी सरकारी योजना के नाम पर आधार कार्ड की फोटो मांगी और पैसे का आधा हिस्सा देने का वादा किया. आठ दिन बाद उनके खाते में 5,000 रुपये आए. कथित तौर पर पैसे देने वाला राम बाबू अब पुलिस हिरासत में है. हजारी लाल का कहना है कि उन्हें आज तक नहीं पता कि यह रकम किस योजना के तहत आई थी.
एक किस्त में 32,000 रुपये मिले
झालावाड़ के बत्तुखेरी गांव में मोबाइल दुकान चलाने वाले दिनेश कुमार ने कहा कि उन्होंने भी सब लोग कर रहे थे. ऐसे में सोचकर एक फॉर्म भरा और आधार विवरण साझा किया. बाद में उनकी पत्नी के खाते में पीएम-किसान के तहत पैसे आए, जबकि उनके पास खुद कोई जमीन नहीं है. कुछ महीने पहले उन्हें एक किस्त में 32,000 रुपये मिले. जबकि पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों में दिए जाते हैं.
कलेक्टर और साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत की थी
मदनपुरा गांव में छोटा क्लिनिक चलाने वाले राम दयाल ने कहा कि उनके खाते में बिना जानकारी के 33,000 रुपये जमा हो गए, जिसके बाद उन्होंने खुद अधिकारियों को इसकी सूचना दी. राम दयाल ने कहा कि उन्होंने कलेक्टर और साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत की थी. बाद में एक फोटो कॉपी दुकान के कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया और उनके खाते से आई रकम वापस ले ली गई. इसी तरह भगवान दास ने कहा कि एक स्थानीय ई-मित्र संचालक ने उन्हें मजदूर योजना का लाभ आधा-आधा बांटने का प्रस्ताव दिया. उसने कहा कि पैसे उनके खाते में आएंगे और दोनों बराबर हिस्सेदारी करेंगे. आसपास के लोग भी आधार नंबर दे रहे थे, इसलिए उन्होंने भी दे दिया. उन्हें 34,000 रुपये मिले.
जांच के बाद 8 अगस्त को सामने आया मामला
जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह मामला 8 अगस्त 2025 को सामने आया, जब एक व्हिसलब्लोअर ने झालावाड़ के कमखेड़ा इलाके में आशिक अली नाम के व्यक्ति से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की जानकारी दी. एसपी अमित कुमार ने साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद साइबर जांच अधिकारी रवि सेन ने कई बैंक खातों की जांच शुरू की. जांच के दौरान अलग-अलग योजनाओं के तहत एक ही दिन समन्वित तरीके से पैसे ट्रांसफर होने का पता चला, जिससे मामला और गंभीर हो गया.
48 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई
पुलिस ने 11,000 से अधिक बैंक खातों को संदिग्ध चिह्नित किया है और 48 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. जांचकर्ताओं के अनुसार, केवल झालावाड़ जिले में ही पीएम-किसान के तहत करीब 14.81 करोड़ रुपये, डीएमआईएस के तहत 3.62 करोड़ रुपये और पेंशन योजना के तहत लगभग इतनी ही राशि का कथित गबन हुआ है. गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद लाइक भी शामिल हैं, जिन्हें पीएम-किसान के राजस्थान नोडल कार्यालय का मुख्य ऑपरेटर बताया गया है.