यूपी कृषि अनुसंधान परिषद ने जारी की एडवाइजरी, गेहूं और गन्ना किसान जरूर करें ये काम.. वरना होगा नुकसान!

उत्तर प्रदेश में मार्च से गर्मी बढ़ने की संभावना है. उपकार ने किसानों को रबी फसलों में हल्की सिंचाई, गेहूं में पोटैशियम नाइट्रेट और रोग नियंत्रण की सलाह दी है. जायद फसलों की बुवाई अनुकूल है. गन्ने के साथ उर्द, मूंग या लोबिया की अंतर फसल से किसान आय बढ़ा सकते हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Feb, 2026 | 05:54 PM

UP Agricultural Research Council Advisory: कल यानी रविवार से मार्च का महीना शुरू हो जाएगा. इसके साथ ही मौसम में बदलाव का दौर शुरू हो जाएगा. कुछ दिनों के बाद गर्म हवाएं चलनी शुरू हो जाएंगी. इससे इंसान के साथ-साथ फसल और पशुओं पर भी सीधा असर पड़ेगा. ऐसे में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) ने किसानों को लेकर एडवाइजरी जारी की है. एडवाइजरी में बढ़ती गर्मी और तेज धूप से रबी फसलों को बचाने की सलाह दी गई है. इसके लिए किसानों को समय-समय पर फसल की हल्की सिंचाई करने के लिए कहा गया है.

उत्तर प्रदेश में बढ़ते तापमान और तेज हवाओं को देखते हुए विशेषज्ञों ने किसानों को रबी फसलों के खेतों में नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है. देर से बोए गए गेहूं में दाना भरने के दौरान पोटैशियम नाइट्रेट का पर्णीय छिड़काव करने और गेहूं में गेरूई व पत्ती धब्बा रोग से बचाव के लिए प्रोपीकोनाजोल का प्रयोग करने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा चने में फलीबेधक कीट और अरहर में फल मक्खी के प्रकोप को रोकने के लिए उचित कीटनाशकों के छिड़काव की सलाह दी गई है.

अगले दो हफ्तों के लिए कृषि प्रबंधन संबंधी अहम सुझाव जारी

दरअसल, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की 24वीं बैठक हुई. बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त डेटा के आधार पर किसानों को अगले दो हफ्तों के लिए कृषि प्रबंधन संबंधी अहम सुझाव दिए गए. मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश के सभी कृषि क्षेत्रों में मौसम खासतौर पर शुष्क रहेगा और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी.

किसान गन्ने के खेत में उर्द, मूंग या लोबिया की खेती करें

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद की बैठक में बताया गया कि वर्तमान मौसम जायद की फसलों जैसे टमाटर, भिंडी, लोबिया और कद्दू जैसी सब्जियों की बुवाई के लिए पूरी तरह अनुकूल है. बैठक में किसानों को बसंतकालीन गन्ने की बुवाई में नवीन उन्नत किस्मों के उपयोग पर जोर देने के साथ-साथ लाल सड़न रोग से संक्रमित किस्म -0238 की बुवाई न करने की सख्त हिदायत दी गई. विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि गन्ने के साथ अंतर फसल के रूप में उर्द, मूंग या लोबिया की खेती कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं.

पशुपालकों को निशुल्क टीका लगाने की सलाह

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने उद्यान और अन्य प्रभागों के लिए आम के बौर को कीट और खर्रा रोग से बचाने के उपाय बताए हैं. पशुपालकों को एफएमडी के निशुल्क टीकाकरण का लाभ उठाने की सलाह दी गई है, जबकि मत्स्य पालकों को कॉमन कार्प और पंगेशियस मछली बीज सुरक्षित रूप से संग्रहित करने का सुझाव दिया गया है. बैठक की पूरी रिपोर्ट उपकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है.

क्या है लाल सड़न रोग और कैसे करें इसकी पहचान

लाल सड़न (Red Rot) को गन्ने का ‘कैंसर’ भी कहा जाता है. ये गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने वाला एक गंभीर रोग है. इसके कुछ लक्षण हैं जिनकी पहचान कर किसान इसको कंट्रोल करने के उपाय कर सकते हैं. इस रोग के संक्रमण से गन्ने के तने में लाल या भूरे रंग की सड़न पड़ने लगती है. जिसके कारण तनों पर लाल धब्बे पड़ने लगते हैं और पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती हैं. आगे चलकर ये रोग गन्ने के तनों को अंदर से पूरी तरह खोखला बना देता है.

लाल सड़न रोग से किसानों को होता है नुकसान

लाल सड़न रोग से प्रभावित गन्ने का वजन कम हो जाता है, जिससे कुल उपज में भारी गिरावट आती है. खास बात यह है कि लाल सड़न रोग गन्ने की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है, जिससे पैदावार में 40 फीसदी तक की कमी आ सकती है और चीनी की मात्रा (रिकवरी) घटकर 50 फीसदी से भी कम हो सकती है. जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है.

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Published: 28 Feb, 2026 | 05:52 PM

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