अब जंगली जानवरों से बर्बाद नहीं होगी किसानों की मेहनत, सीएम योगी ने कर दिया बड़ा ऐलान

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की फसलों को जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के लिए सोलर फेंसिंग उपलब्ध करा रही है. यह सौर ऊर्जा से चलने वाला सुरक्षित उपाय है, जो कम खर्च में खेतों को सुरक्षा देता है. इससे फसल नुकसान घटेगा और किसानों की आय सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.

नोएडा | Updated On: 10 Apr, 2026 | 08:50 AM

Crop Protection: उत्तर प्रदेश में किसानों की फसलों को जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को सोलर फेंसिंग उपलब्ध करा रही है. इसका उद्देश्य फसलों को नुकसान से बचाना और किसानों की आय को सुरक्षित करना है. सरकार का कहना है कि यह सौर ऊर्जा से चलने वाला सुरक्षित और टिकाऊ उपाय है, जिसे कम खर्च और कम रखरखाव में लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है.

फसलों की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से फसलों  को होने वाला नुकसान किसानों के लिए बड़ी समस्या रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार सोलर फेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंचा रही है. उन्होंने बताया कि यह मॉडल किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है और उत्तर प्रदेश का यह तरीका अब देश के दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहा है. सरकार का मानना है कि इससे खेतों में रात के समय होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा.

कैसे काम करती है सोलर फेंसिंग?

सोलर फेंसिंग  सौर ऊर्जा से चलने वाली एक सुरक्षित सुरक्षा प्रणाली है. इसमें 12 वोल्ट की सुरक्षित करंट प्रवाहित होती है, जो खेत के पास आने वाले जानवरों को हल्का झटका देकर डराती है, लेकिन उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाती. इस सिस्टम में सोलर पैनल, बैटरी, झटका मशीन (एनर्जाइजर), वायर, इंसुलेटर और सायरन लगाए जाते हैं. दिन में सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली बनाता है और बैटरी में स्टोर करता है. रात में यही बैटरी फेंसिंग को चालू रखती है. अगर कोई जानवर तार को छूता है तो उसे हल्का झटका लगता है और वह खेत से दूर भाग जाता है. वहीं अगर कोई तार काटने या छेड़ने की कोशिश करता है तो सायरन बजने लगता है, जिससे किसान तुरंत सतर्क हो सकते हैं.

कम खर्च, ज्यादा सुरक्षा और आसान रखरखाव

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सोलर फेंसिंग किसानों के लिए किफायती और लंबे समय तक चलने वाला समाधान है. इसमें बिजली का अलग खर्च नहीं आता, क्योंकि यह पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित है. इसका रखरखाव भी आसान है. समय-समय पर बैटरी, वायर और सोलर पैनल की सफाई करने से यह कई साल तक बेहतर काम करती है. खासकर उन इलाकों में, जहां नीलगाय, जंगली सूअर, बंदर या आवारा पशु फसलों को नुकसान  पहुंचाते हैं, वहां यह तकनीक काफी असरदार मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे किसानों की फसल बचने के साथ उनकी लागत भी कम होती है और उत्पादन में स्थिरता बनी रहती है.

गौ-आश्रय और फसल सुरक्षा पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में यह भी बताया कि प्रदेश सरकार ने 6,700 निराश्रित गौ-आश्रय स्थल बनाकर करीब 16 लाख निराश्रित गौवंश को संरक्षित  किया है. इसके अलावा जो लोग निराश्रित गौवंश का पालन कर रहे हैं, उन्हें सरकार 1,500 रुपये प्रति पशु प्रति माह दे रही है. सरकार का मानना है कि गौ-आश्रय स्थलों और सोलर फेंसिंग जैसे उपायों से किसानों को दोहरा फायदा मिलेगा. एक तरफ आवारा पशुओं से फसल सुरक्षित होगी, दूसरी तरफ निराश्रित गौवंश को भी संरक्षण मिलेगा.

Published: 10 Apr, 2026 | 08:39 AM

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