धान-मक्का-जौ की 6 नई किस्मों को मंजूरी, किसानों को मिलेगा ज्यादा उत्पादन का फायदा
उत्तराखंड के किसानों के लिए नई उम्मीद जगी है. धान, जौ, मक्का, सरसों और चारा फसलों की 6 नई किस्मों को मंजूरी मिली है. पंत धान 29 सिर्फ 115 दिन में तैयार होगी, जबकि पंत जौ 1091 ने पुरानी किस्मों से बेहतर उपज देकर किसानों का ध्यान खींचा है.
New Crop Varieties: उत्तराखंड के किसानों के लिए राहत और फायदे की खबर है. कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित धान, जौ, मक्का, सरसों और चारा फसलों की 6 नई उन्नत किस्मों को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है. पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में इन किस्मों को राज्य के अलग-अलग कृषि क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. खास बात यह है कि धान की एक नई किस्म महज 115 दिन में पककर तैयार हो जाएगी, जबकि नई जौ किस्म ने पुरानी किस्मों के मुकाबले बेहतर उत्पादन क्षमता दिखाई है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन किस्मों से अनाज के साथ पशु चारे का उत्पादन भी बढ़ेगा.
6 नई किस्मों को मिली सरकारी मंजूरी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में आयोजित उत्तराखंड राज्य बीज उप-समिति की 16वीं बैठक में इन सभी 6 किस्मों को मंजूरी दी गई. इनमें धान की पंत धान 29, जौ की पंत जौ 1091, मक्का की हाइब्रिड किस्म पंत मक्का 9, सरसों की पीएआरबी 2015-2, चारे की पंत जरी 16 और चारे वाली जई की पंत फॉडर ओट 5 शामिल हैं. इन किस्मों का विकास किसानों को बेहतर उत्पादन, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसल और चारे की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है.
धान की किस्म 115 दिन में होगी तैयार
नई पंत धान 29 कम अवधि में पकने वाली धान की किस्म है. इसके पौधे बौने कद के होते हैं और यह लगभग 115 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इसकी उपज क्षमता 29 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है. कम समय में तैयार होने के कारण किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए भी अधिक समय मिल सकता है. साथ ही, फसल की अवधि कम होने से कीट और रोगों के प्रकोप का जोखिम भी अपेक्षाकृत कम रहने की उम्मीद है.
जौ की नई किस्म पुरानी किस्मों से बेहतर
जौ की पंत जौ 1091 ने उत्पादन के मामले में कई प्रचलित किस्मों से बेहतर प्रदर्शन किया है. परीक्षणों में इसने यूपीबी 1008 से 21.98 प्रतिशत, वीएलबी 130 से 8.36 प्रतिशत और वीएलबी 118 से 5.87 प्रतिशत अधिक उपज दी. पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी औसत उपज क्षमता 38.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आंकी गई है. यह किस्म रतुआ और कवर्ड स्मट जैसे प्रमुख रोगों के प्रति भी बेहतर सहनशीलता रखती है, जिससे किसानों को फसल सुरक्षा में मदद मिल सकती है.
मक्का, सरसों और चारा फसलों को भी बढ़ावा
धान और जौ के अलावा मक्का, सरसों और चारा फसलों की नई किस्मों को भी मंजूरी दी गई है. पंत मक्का 9 हाइब्रिड किस्म है, जबकि सरसों की नई किस्म बेहतर उत्पादन क्षमता के लिए विकसित की गई है. वहीं, पंत जरी 16 और पंत फॉडर ओट 5 जैसी चारा किस्मों से पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण हरा और सूखा चारा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. इससे खेती के साथ पशुपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने और पशुओं के लिए चारे की समस्या कम करने की उम्मीद है.