उत्तराखंड के किसानों के लिए अच्छी खबर है. गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों की विकसित की गई 6 उन्नत फसल किस्मों को राज्य में खेती के लिए मंजूरी मिल गई है. इन किस्मों की खेती राज्य के अलग-अलग कृषि और जलवायु क्षेत्रों में की जा सकेगी. वैज्ञानिकों का कहना है कि इनसे अनाज और पशु चारे का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे किसानों की आय बढ़ने की भी उम्मीद है. मंजूर की गई किस्मों में धान, जौ, मक्का, सरसों, चारा ज्वार और जई शामिल हैं. इन किस्मों को देहरादून में हुई उत्तराखंड राज्य बीज उप-समिति की 16वीं बैठक में मंजूरी दी गई.
धान से लेकर चारे तक 6 नई किस्मों को मंजूरी
उत्तराखंड में मंजूर की गई 6 उन्नत फसल किस्मों में पंत धान-29, पंत जौ-1091 (UPB-1091), पंत हाइब्रिड मक्का-9 (DH-353), PRB 2015-2 सरसों, पंत चारी-16 (UTFS-121) चारा ज्वार और पंत फोडर ओट-5 (UPO-16-4) जई शामिल हैं. इन किस्मों को देहरादून में हुई उत्तराखंड राज्य बीज उप-समिति की 16वीं बैठक में मंजूरी दी गई. बैठक की अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण सचिव डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडेय ने की.
पंत धान-29 कम समय में देगा ज्यादा उत्पादन
इन सभी किस्मों को पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की अलग-अलग टीमों ने विकसित किया है. वैज्ञानिकों ने धान, गेहूं-जौ, मक्का, तिलहन, ज्वार और जई की ब्रीडिंग से जुड़ी परियोजनाओं के तहत इन किस्मों को तैयार किया है. पंत धान-29 कम समय में तैयार होने वाली और ज्यादा उत्पादन देने वाली बौनी धान की किस्म है. यह करीब 115 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और इससे करीब 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिल सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, फसल का समय कम होने से कीट और रोगों का असर भी कम रहता है.
पंत जौ-1091 ने उत्पादन में पुरानी किस्मों को पीछे छोड़ा
वहीं, पंत जौ-1091 ने तीन साल के परीक्षण में पुरानी किस्मों के मुकाबले बेहतर उत्पादन दिया. इसका उत्पादन UPB-1008 से 21.98 फीसदी, VLB-130 से 8.36 फीसदी और VLB-118 से 5.87 फीसदी ज्यादा रहा. पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी उत्पादन क्षमता 38.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है. यह किस्म रस्ट और कवर स्मट रोग के प्रति भी प्रतिरोधी है.
6 फसलों की नई किस्मों को मंजूरी
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि छह फसलों की उन्नत किस्मों को मंजूरी मिलना विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि है. इनमें दो चारा फसलें भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन नई किस्मों से अनाज और पशु चारे का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी और उनकी आय में भी इजाफा होने की उम्मीद है.