खेती में AI की एंट्री! अब पलभर में होगी फसल की बीमारी और कीटों की पहचान

खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किसानों के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है. AI से फसल में कीट और बीमारी की पहचान, ड्रोन-सैटेलाइट से निगरानी और मौसम के हिसाब से सलाह मिल सकेगी. कानपुर में विशेषज्ञों ने खेती को स्मार्ट और कम लागत वाली बनाने पर चर्चा की.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 13 Sep, 2026 | 08:30 PM

कानपुर में आयोजित AI मंथन 2.0 के एग्रीकल्चर ट्रैक में कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा हुई. कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि AI की मदद से खेती को ज्यादा सटीक, मौसम के अनुकूल और कम खर्च वाली बनाया जा सकता है. फसलों में कीट और रोग की पहचान, मौसम के हिसाब से खेती, डिजिटल सलाह और बेहतर संसाधन प्रबंधन जैसे कामों में AI किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है.

AI से खेती होगी ज्यादा सटीक और स्मार्ट

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), IIT रोपड़ और उत्तर प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए. विशेषज्ञों ने बताया कि खेती में AI के इस्तेमाल से किसानों को फसल की स्थिति के बारे में समय पर जानकारी मिल सकती है. इससे किसान सही समय पर जरूरी कदम उठा सकेंगे और अनावश्यक खर्च को कम कर पाएंगे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, IIT रोपड़ के मुकेश सैनी ने AI आधारित कृषि तकनीक पर काम कर रहे संस्थान के Centre of Excellence ANNAM.AI की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस प्लेटफॉर्म ने 24 राज्यों से फसलों से जुड़े 1.08 करोड़ से ज्यादा चिन्हित डेटा पॉइंट का डेटाबेस तैयार किया है.

फसल में कीट और बीमारी की पहचान होगी आसान

ANNAM.AI के तैयार किए गए डेटा का इस्तेमाल AI आधारित ऐसे टूल विकसित करने में किया जा रहा है, जो फसलों में कीट और रोग की पहचान करने में मदद कर सकते हैं. इसका फायदा किसानों को यह होगा कि फसल में समस्या दिखाई देने पर उसके कारण का पता लगाने में आसानी होगी. विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर बीमारी या कीट की पहचान  होने से किसान समय रहते फसल की सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं. इससे नुकसान कम करने और उत्पादन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

ड्रोन और सैटेलाइट से मिलेगी खेती की जानकारी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ICAR के अनिल राय ने बताया कि AI खेती को पारंपरिक तरीके  से आगे बढ़ाकर क्लाइमेट-स्मार्ट और प्रिसिजन एग्रीकल्चर की दिशा में ले जा रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों, ड्रोन और रियल टाइम डेटा का इस्तेमाल करके खेतों और फसलों की स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकता है. इन तकनीकों की मदद से फसल की निगरानी, पानी और अन्य कृषि संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल तथा मौसम से जुड़ी चुनौतियों के बीच सही फैसले लेने में मदद मिल सकती है. इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत कम करने का रास्ता भी तैयार हो सकता है.

Kisan Sarathi से किसानों को मिलेगी डिजिटल सलाह

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम के समापन पर ICAR के संजीव कुमार ने ‘Kisan Sarathi’ डिजिटल एक्सटेंशन प्लेटफॉर्म के बारे में जानकारी दी. यह प्लेटफॉर्म Digital India Corporation के साथ मिलकर तैयार किया गया है. इसके जरिए किसानों को विशेषज्ञों से जोड़ने का प्रयास किया गया है. Kisan Sarathi में कई भाषाओं में AI आधारित सलाह  की सुविधा दी जा रही है. इससे किसान अपनी भाषा में खेती से जुड़े सवालों का जवाब और जरूरी कृषि सलाह प्राप्त कर सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI आधारित ऐसी सेवाएं किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने और खेती को ज्यादा आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 13 Sep, 2026 | 08:30 PM