सरसों पर दो खतरनाक रोगों का हमला! सफेद रस्ट और पाउडरी मिल्ड्यू से ऐसे बचाएं फसल
फरवरी के मौसम में सरसों की फसल पर फंगल रोगों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. सफेद रस्ट और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोग उत्पादन घटा सकते हैं. समय पर पहचान, सही दवा का छिड़काव और खेत की नियमित निगरानी से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, जिससे पैदावार बेहतर रहती है.
Mustard Crop: ठंडी सुबह और हल्की धूप के बीच खेतों में लहलहाती सरसों किसानों को खुश जरूर करती है, लेकिन फरवरी का मौसम इस फसल के लिए थोड़ा नाजुक भी माना जाता है. मौसम में अचानक बदलाव और नमी बढ़ने से फसल पर रोगों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही किसानों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है. इस समय सरसों की फसल की सही देखभाल करना बेहद जरूरी है, ताकि उत्पादन पर कोई असर न पड़े.
फरवरी में बढ़ जाता है रोगों का खतरा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फरवरी के महीने में मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. कभी हल्की ठंड तो कभी गर्माहट और हवा के साथ नमी बढ़ने लगती है. यही स्थिति सरसों की फसल के लिए जोखिम पैदा करती है. इस समय खेतों में फंगल रोग तेजी से फैल सकते हैं, जो पौधों के विकास को रोक देते हैं. किसानों को इस दौरान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते रहना चाहिए. समय पर रोग की पहचान हो जाए तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
सफेद रस्ट से फसल को बड़ा नुकसान
सफेद रस्ट सरसों की फसल में लगने वाला एक खतरनाक रोग है. यह रोग पत्तियों के निचले हिस्से पर सफेद धब्बों के रूप में दिखाई देता है. धीरे-धीरे यह पूरे पौधे को प्रभावित कर देता है और उसकी बढ़वार रुक जाती है. इस रोग के कारण फसल पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती और पैदावार कम हो जाती है. तेज हवा के कारण यह रोग एक खेत से दूसरे खेत तक फैल सकता है, इसलिए समय रहते रोकथाम करना जरूरी है.
पाउडरी मिल्ड्यू भी बनता है परेशानी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में पाउडरी मिल्ड्यू रोग का खतरा भी बढ़ जाता है. इस रोग में पत्तियों और तनों पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ दिखाई देने लगता है. इससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और दानों का विकास प्रभावित होता है. अगर समय पर इस रोग को नियंत्रित नहीं किया गया, तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. इसलिए किसानों को मौसम में बदलाव के साथ फसल पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
समय पर बचाव से सुरक्षित रहेगी फसल
इन रोगों से बचाव के लिए सही दवाओं का छिड़काव करना जरूरी है. फसल में मैनेकोजेब या कार्बेंडाजिम का घोल बनाकर छिड़काव करने से फंगल रोगों को नियंत्रित किया जा सकता है. इसके साथ ही खेत में संतुलित नमी बनाए रखना, ज्यादा घनी बुवाई से बचना और समय-समय पर पौधों की जांच करना भी जरूरी है. अगर किसान शुरुआत में ही सावधानी बरतें, तो फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और अच्छी पैदावार मिल सकती है.