तेलंगाना में गहराया जल संकट, सरकार ने किसानों से धान की बुवाई नहीं करने की अपील की
अल नीनो और कमजोर मॉनसून के कारण तेलंगाना में जल संकट गहराने लगा है. सरकार ने किसानों को धान की सिंचाई के लिए भूजल का इस्तेमाल नहीं करने और नई बुवाई में धान की जगह वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह दी है. राज्य के 33 में से 23 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है.
Paddy Cultivation: तेलंगाना में अल नीनो और कमजोर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के कारण जल संकट गहराने लगा है. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को धान की सिंचाई के लिए भूजल का उपयोग नहीं करने की सलाह दी है. साथ ही, जिन किसानों ने अभी तक धान की बुवाई नहीं की है, उनसे पानी की कम जरूरत वाली वैकल्पिक फसलें अपनाने की अपील की गई है.
कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद यह सलाह जारी की. उन्होंने कहा कि अगर बारिश की स्थिति नहीं सुधरी, तो रबी सीजन में पानी का संकट और गहरा सकता है. खासकर दिसंबर का महीना सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. मंत्री ने अधिकारियों को किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि लगातार गिरते भूजल स्तर और जलाशयों में कम पानी आने की वजह से आने वाले समय में उपलब्ध पानी मुख्य रूप से पीने के लिए ही बच सकता है. इसलिए किसानों को समय रहते वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने की जरूरत है.
10,06,511 एकड़ क्षेत्र में धान की बुवाई
कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि जिन किसानों ने अभी तक धान की बुवाई नहीं की है, उन्हें बीच-बीच में होने वाली बारिश को देखकर धान नहीं लगाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह बारिश धान की पूरी फसल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं करा पाएगी. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 21 जुलाई तक तेलंगाना में 10,06,511 एकड़ क्षेत्र में धान की बुवाई हो चुकी है. ऐसे में सरकार की इस सलाह से पहले से धान लगाने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि, अगर सिंचाई के लिए पानी की कमी होती है तो सरकार ने फिलहाल किसानों के लिए किसी विशेष राहत या सहायता का ऐलान नहीं किया है.
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23 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई
मंत्री ने कहा कि जिला स्तर की समीक्षा में पूरे तेलंगाना में मॉनसून की स्थिति लगातार खराब होती दिख रही है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को सौंपी जाएगी. कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने बताया कि तेलंगाना के 33 में से 23 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी बारिश कम होने के कारण कृष्णा और गोदावरी नदियों में पानी का प्रवाह कम रहने की आशंका है. इससे राज्य में जल संकट और बढ़ सकता है.
जागरूकता टीमें बनाने के निर्देश दिए
मंत्री ने अधिकारियों को मंडल और गांव स्तर पर निगरानी व जागरूकता टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं. ये टीमें कमजोर मॉनसून से निपटने के लिए पहले से गठित जिला स्तरीय विशेष अधिकारी समितियों के साथ मिलकर काम करेंगी और किसानों को जरूरी सलाह देंगी. सरकार की ओर से बनाई जाने वाली टीमें किसानों को अल नीनो के असर, राज्य में उपलब्ध पानी की स्थिति और कम पानी में होने वाली वैकल्पिक फसलों के बारे में जानकारी देंगी. साथ ही किसानों को हालात के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह भी दी जाएगी.