तमिलनाडु में पानी की किल्लत, सिंचाई के अभाव में 30000 हेक्टेयर में खड़ी फसल को नुकसान

आमतौर पर जिले में करीब 1.4 लाख हेक्टेयर में सांबा धान की खेती होती है, जो किसानों के लिए एक प्रमुख सीजन माना जाता है. लेकिन इस साल अनियमित पानी की आपूर्ति और लंबे सूखे के कारण फसल की बढ़वार पर बुरा असर पड़ा है.

नोएडा | Updated On: 16 Feb, 2026 | 12:54 PM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में सिंचाई के अभाव में फसलों को नुकसान पहुंच रहा है. कृषि विभाग की जांच में पता चला है कि जिले में लगभग 30,000 हेक्टेयर खेती की जमीन पानी की कमी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है. सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से कई जगह फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई. यह स्थिति तब सामने आई है जब जिले में सांबा धान की कटाई करीब 55 फीसदी पूरी हो चुकी है. अधिकारियों के अनुसार, उत्पादन में 50,000 टन से ज्यादा की कमी आने की आशंका है, जबकि जिले का औसत धान उत्पादन लगभग 3.5 लाख टन रहता है. इससे हजारों धान किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आमतौर पर जिले में करीब 1.4 लाख हेक्टेयर में सांबा धान की खेती  होती है, जो किसानों के लिए एक प्रमुख सीजन माना जाता है. लेकिन इस साल अनियमित पानी की आपूर्ति और लंबे सूखे के कारण फसल की बढ़वार पर बुरा असर पड़ा है. खासकर वर्षा पर निर्भर और नहर के अंतिम छोर वाले इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब रही. कदलाडी, कामुधी, परमकुडी और मुदुकुलाथुर के कई हिस्सों में खड़ी फसल जरूरी समय पर पानी न मिलने से सूख गई, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है.

उत्पादन घटकर 2.75 लाख टन रहने की संभावना

कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जिन इलाकों में पानी की उपलब्धता थोड़ी बेहतर है, वहां कटाई अभी भी जारी है. लेकिन कुल उत्पादन को लेकर तस्वीर चिंताजनक बनी हुई है. आम तौर पर जिले में सांबा सीजन के दौरान करीब 3.5 लाख टन धान का उत्पादन होता है, लेकिन इस साल बड़े पैमाने पर फसल सूखने के कारण उत्पादन घटकर लगभग 2.75 लाख टन रहने की संभावना है. कृषि विभाग ने फसल नुकसान को लेकर विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है और मुआवजे की मांग की है. साथ ही, नुकसान का सही आकलन करने के लिए फील्ड निरीक्षण जारी है, ताकि मंजूरी मिलने के बाद फसल बीमा योजना  के तहत किसानों को मुआवजा दिया जा सके. सर्वे टीमें गांव-गांव जाकर नुकसान का रिकॉर्ड तैयार कर रही हैं.

सरकार से राहत प्रक्रिया तेज करने की मांग

इस बीच स्थानीय किसान संगठनों ने सरकार से राहत प्रक्रिया तेज  करने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर सहायता राशि देने में देरी हुई तो छोटे और सीमांत किसान अगले सीजन से पहले कर्ज में डूब सकते हैं. रामनाथपुरम क्षेत्र के किसान बक्कियानाथन ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में प्रति एकड़ करीब 30,000 रुपये का निवेश किया था. किसान ने कहा कि हमने उम्मीद के साथ खेत तैयार किए थे, लेकिन पानी न मिलने से फसल पकने से पहले ही सूख गई. हमारी उपज भी चली गई और लगाया हुआ पैसा भी डूब गया. अगर हमें तुरंत मुआवजा नहीं मिला तो आगे खेती जारी रखना मुश्किल हो जाएगा. किसान संगठनों ने सिर्फ तुरंत राहत ही नहीं, बल्कि लंबे समय के समाधान की भी मांग की है. उन्होंने बेहतर जल प्रबंधन, तालाबों की सफाई (डीसिल्टिंग) और पक्की सिंचाई योजना लागू करने की जरूरत बताई है, ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो.

Published: 16 Feb, 2026 | 12:52 PM

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