धान की कीमत में 30 फीसदी की बढ़ोतरी, 35 रुपये किलो रेट.. किसान कर रहे बंपर कमाई

तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में सांबा धान की कटाई चरम पर है, जिससे बारीक और सुपरफाइन किस्मों के दाम लगभग 30 फीसदी बढ़ गए हैं. कर्नाटक से आपूर्ति कम होने और मजबूत मांग के कारण किसानों को बेहतर लाभ मिल रहा है.. पैकिंग और स्टोरेज सुविधाओं से बाजार संतुलित रखने की कोशिश हो रही है.

Kisan India
नोएडा | Published: 29 Jan, 2026 | 06:00 AM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में सांबा धान की कटाई तेजी पकड़ रही है, जिससे बारीक और सुपरफाइन धान की बिक्री में तेजी आई है. साथ ही दाम पिछले साल की तुलना में 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं. राइस मिलरों के मुताबिक, इस सीजन में प्रीमियम किस्मों की मांग मजबूत बनी हुई है, क्योंकि पड़ोसी राज्यों से धान की आपूर्ति कम हुई है. सांबा धान की खेती आमतौर पर सितंबर से जनवरी के बीच होती है और अब कटाई अपने चरम पर है. बारीक किस्मों की अधिक मांग के कारण खुले बाजार में हलचल बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि इस साल दाम बढ़ने से उन्हें बेहतर लाभ मिला है, जबकि पिछले साल उत्पादन अच्छा होने के बावजूद दाम कम थे.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, MADITSSIA के फूड एंड एग्रो पैनल के चेयरपर्सन ए. अंबरासन ने कहा कि तमिलनाडु अभी भी राइस आपूर्ति  के लिए कर्नाटक पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि इस साल कर्नाटक में तुंगभद्रा डैम के कामों के चलते धान की खेती कम हुई, जिससे आपूर्ति घटकर मांग बढ़ गई और दाम लगभग 30 फीसदी बढ़ गए. आम तौर पर बिकने वाली किस्में RNR और Akshaya पिछले साल 26 और 31 रुपये प्रति किलो थीं, जो अब 29 और 35 रुपये प्रति किलो पहुंच गई हैं.

60 फीसदी बारीक किस्में पड़ोसी राज्यों से आती हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि धान के दाम  बढ़ने से किसान अधिक मांग वाली बारीक और सुपरफाइन किस्में उगाने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे तमिलनाडु की बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम हो सकती है. कृषि और व्यापार चैम्बर के के. सुरेश कुमार ने कहा कि बाजार में लगभग 60 फीसदी बारीक किस्में पड़ोसी राज्यों से आती हैं. उन्होंने कहा कि मजबूत मांग के कारण यह मामूली कीमत वृद्धि फायदेमंद है और किसानों को खासकर वैगई बेसिन में प्रीमियम किस्मों की खेती की ओर बढ़ना चाहिए.

पैकिंग और स्टोरेज सुविधाओं का निर्माण

उन्होंने यह भी कह कि चैम्बर ने मदुरै के 25 राइस मिलरों के साथ मिलकर 25,000 टन क्षमता वाले सुखाने, पैकिंग और स्टोरेज  सुविधाओं का निर्माण किया है, जिससे बाजार की मांग को संतुलित किया जा सके. विशेषज्ञों ने सरकार से भी कहा कि किसानों को स्थायी लाभ के लिए बाजार-आधारित किस्मों की खेती को बढ़ावा देना चाहिए. वहीं कई किसान कीमतों में वृद्धि से उत्साहित तो हैं, लेकिन मौसम में आर्द्रता के कारण कीट और फसल रोग का खतरा होने की चेतावनी भी दे रहे हैं, जो बाकी कटाई पर असर डाल सकता है.

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Published: 29 Jan, 2026 | 06:00 AM

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