जलजमाव से धान पर मंडराया बीमारी का खतरा! ब्लास्ट रोग से फसल को बचाएंगे ये आसान देसी उपाय

लगातार बारिश और खेतों में जलजमाव से धान की फसल में ब्लास्ट रोग का खतरा बढ़ रहा है. यह बीमारी पौधों को कमजोर कर उत्पादन घटा सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने नीम घोल, छाछ और बेकिंग सोडा जैसे आसान उपाय अपनाने की सलाह दी है.

नोएडा | Published: 31 Jul, 2026 | 10:20 AM

Paddy Farming: मॉनसून में लगातार बारिश के कारण खेतों में जलजमाव की समस्या बढ़ जाती है. इसका सीधा असर धान की फसल पर पड़ता है. अधिक नमी और पानी जमा रहने से धान के पौधों में फफूंद जनित रोग तेजी से फैलने लगते हैं. इनमें ब्लास्ट रोग किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनकर सामने आता है. यह रोग समय पर नियंत्रित नहीं किया गया तो हरे-भरे पौधे कमजोर होकर सूख सकते हैं और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान की फसल को ब्लास्ट रोग से बचाने के लिए किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बेहतर रखनी चाहिए. इसके साथ ही शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही प्राकृतिक और वैज्ञानिक उपाय अपनाकर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.

ज्यादा नमी से बढ़ता है ब्लास्ट रोग का खतरा

धान की फसल में ब्लास्ट रोग  एक फफूंद से फैलने वाली बीमारी है. लगातार बारिश, खेत में पानी जमा रहना और अधिक नमी वाला मौसम इस रोग के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है. शुरुआत में पौधों की पत्तियों पर छोटे-छोटे काले या भूरे धब्बे दिखाई देने लगते हैं. धीरे-धीरे यह संक्रमण तने और बालियों तक पहुंच सकता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं. गंभीर स्थिति में पौधे सूखने लगते हैं और धान की बालियों में दाने कम बनते हैं. इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों प्रभावित होती हैं.

नीम के घोल से करें फफूंद पर नियंत्रण

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि किसान कुछ घरेलू उपाय अपनाकर भी शुरुआती स्तर पर ब्लास्ट रोग के प्रभाव को कम कर सकते हैं. नीम की पत्तियों का घोल प्राकृतिक रूप से फफूंद को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसके लिए किसान नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उसका घोल तैयार कर सकते हैं. ठंडा होने के बाद इस घोल का छिड़काव धान की फसल पर करने से फफूंद के फैलाव को रोकने में सहायता मिल सकती है.

छाछ और बेकिंग सोडा का छिड़काव भी फायदेमंद

धान की फसल को फंगस  से बचाने के लिए छाछ का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. छाछ में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया फफूंद की गतिविधि को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. किसान 10 लीटर पानी में करीब 2 लीटर छाछ मिलाकर फसल पर छिड़काव कर सकते हैं. इसके अलावा बेकिंग सोडा का घोल भी फफूंद नियंत्रण में सहायक माना जाता है. एक लीटर पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर छिड़काव करने से पत्तियों पर बने धब्बों को कम करने में मदद मिल सकती है.

खेत में जल निकासी रखें, संक्रमित पौधे हटाएं

ब्लास्ट रोग से बचाव के लिए किसानों को खेत में पानी जमा नहीं  होने देना चाहिए. बारिश के बाद खेत से अतिरिक्त पानी बाहर निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए. जलजमाव रहने से रोग तेजी से फैल सकता है. इसके अलावा जिन पौधों में संक्रमण ज्यादा दिखाई दे, उन्हें हटाकर खेत से दूर नष्ट कर देना चाहिए. समय-समय पर फसल की निगरानी, संतुलित खाद का उपयोग और उचित प्रबंधन अपनाकर किसान धान की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, शुरुआती पहचान और सही समय पर उपाय करने से ब्लास्ट रोग से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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