देश की 290 लाख हेक्टेयर जमीन उपजाऊ हुई, गांवों में बने 665 मृदा परीक्षण केंद्रों का कमाल
World Soil Health Day: मिट्टी में सुधार की बड़ी वजह मिट्टी की समय पर जांच के बाद किसानों को उसके अनुसार फसल बुवाई, सिंचाई और उर्वरकों के इस्तेमाल की सटीक जानकारी पहुंचाने में सफलता मिली है. इसके नतीजे में देशभर के 40 जिलों में 290 लाख हेक्टेयर जमीन को उपजाऊ बनाने में मदद मिली है.
बीते कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि फसलों का उत्पादन बढ़ा है. खुद केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस रबी सीजन की फसलों के उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनाने का अनुमान जता दिया है और नवंबर में बुवाई आंकड़े लगभग 400 लाख हेक्टेयर पहुंच गए हैं, जो बीते साल की तुलना में कहीं ज्यादा है. कृषि उत्पादन बढ़ने की कई वजहें हैं, लेकिन प्रमुख वजह मिट्टी में सुधार को माना जा रहा है. आज विश्व मृदा दिवस के मौके पर जानते हैं कि मृदा स्वास्थ्य योजना के तहत कैसे मिट्टी जांच लैब यानी सॉइल हेल्थ टेस्ट लैब मिट्टी की सुधार में बड़ी भूमिका निभा रही हैं.
देश में 960 लाख हेक्टेयर जमीन बंजर
भारतीय अंतरिक्ष संस्थान इसरो की ओर से बीते साल देश की बंजर जमीन का आंकड़ा जारी किया गया था. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR–IISWC) देहरादून केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. मुरुगानंदम ने बताया कि इसरो (ISRO) की रिपोर्ट से पता चला है कि भारत की 960 लाख हेक्टेयर भूमि खराब हो चुकी है. उन्होंने कहा कि हर साल 5.3 अरब टन टॉप सॉइल यानी अच्छी मिट्टी पानी और हवा के तेज बहाव के चलते नष्ट हो जाती है. इससे जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर होती जाती है.
देश में 290 लाख हेक्टेयर जमीन उपजाऊ बनी
मिट्टी में सुधार के लिए केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती मिशन के तहत नेचुरल फार्मिंग और जैविक फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है. जबकि, मृदा स्वास्थ्य योजना के जरिए देशभर में मिट्टी जांच के लिए गांव स्तर पर मृदा स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं. इसकी वजह से तेजी से मिट्टी में सुधार देखा गया है और मिट्टी उपजाऊ हुई है. मिट्टी में सुधार की बड़ी वजह मिट्टी की समय पर जांच के बाद किसानों को उसके अनुसार फसल बुवाई, सिंचाई और उर्वरकों के इस्तेमाल की सटीक जानकारी पहुंचाने में सफलता मिली है. इसके नतीजे में देशभर के 40 जिलों में 290 लाख हेक्टेयर जमीन को उपजाऊ बनाने में मदद मिली है.
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भूमि सुधार फंड से 1700 करोड़ से ज्यादा रकम खर्च
मृदा स्वास्थ्य योजना से जुलाई 2025 तक देशभर के 25 करोड़ से किसानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सॉइल हैल्थ कार्ड) बनाए जा चुके हैं. पीएम मोदी ने मृदा स्वास्थ्य योजना की शुरूआत फरवरी 2015 में राजस्थान में की थी. योजना का उद्देश्य मिट्टी को स्वस्थ और उपजाऊ बनाना है. इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को योजना के तहत 1706.18 करोड़ जारी किए जा चुके हैं. इस रकम से मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए अभियान, मिशन और मिट्टी जांच केंद्र चलाए जा रहे हैं.
देश में 8 हजार से ज्यादा मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार देश भर में 8,272 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी है. इनमें 1,068 स्थिर प्रयोगशालाएं हैं और बीते साल सुदूर हिस्सों में पहुंचने के लिए 163 मोबाइल प्रयोगशालाएं भी शुरू की गई हैं. जबकि, देशभर में 6,376 लघु प्रयोगशालाएं और 665 ग्राम-स्तरीय प्रयोगशालाएं संचालित की जा रही हैं. इसके अलावा सहकारिता मंत्रालय के जरिए पैक्स को भी मिट्टी जांच केंद्र के रूप में बदला गया है. इसके साथ ही 1020 स्कूलों के 1.25 लाख छात्रों को भी मिट्टी जांच केंद्रों की शुरुआत, जागरूकता अभियान आदि के लिए जोड़ा गया है. इससे 1000 अन्य मिट्टी की जांच लैब को स्थापित किया गया है.
सरकार के इन प्रयासों से बंजर जमीन में सुधार के साथ खेत की मिट्टी की ताकत बढ़ाने में मदद मिली है.
किसान खेत की मिट्टी की जांच कैसे कराएं
किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच राज्य सरकार के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), ब्लॉक स्तरीय मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला, प्राइवेट लैब या सॉइल हेल्थ कार्ड केंद्र में करवा सकते हैं. इसके लिए किसान सबसे पहले अपने खेत के 5–6 अलग-अलग जगहों से 0–15 सेमी गहराई तक की 500 ग्राम मिट्टी का नमूना लें. यह नमूना साफ, सूखे और लेबल लगे हुए पॉलिथिन बैग या डिब्बे में भरकर नजदीकी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जमा करें और वहां पर जांच हो जाती है. मिट्टी की जांच के लिए किसान को अपनी फसल, खेत का क्षेत्रफल, सिंचाई की स्थिति, उर्वरक उपयोग जैसी जानकारी फॉर्म में भरनी होती है.