Animal Husbandry: गाय-भैंस दे रही है कम दूध? कहीं आपकी ये एक गलती तो नहीं कर रही नुकसान, एक्सपर्ट से जानें

Deworming Benefits For Dairy Animals: पशुओं के पेट में मौजूद कीड़े उनकी सेहत और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार समय-समय पर डी-वॉर्मिंग कराने से कीड़ों को खत्म किया जा सकता है, जिससे पशु स्वस्थ रहते हैं, उनकी भूख बढ़ती है और दूध उत्पादन में भी सुधार देखने को मिलता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 16 Mar, 2026 | 03:01 PM

Animal Husbandry Tips: मौसम में बदलाव का सीधा असर दुधारू पशुओं पर पड़ता है. कई बार पशुपालक शिकायत करते हैं कि उनकी गाय या भैंस अचानक कम दूध देने लगती है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे पाचन खराब होना, शरीर में कमजोरी, प्रसव के बाद थकावट, चारा कम खाना या मौसम का असर.

ऐसे में कई पशुपालक महंगी दवाइयों की जगह घरेलू और सरल उपाय ढूंढते हैं. रीवा मेडिकल कॉलेज की वेटरनरी एक्सपर्ट डॉ. पूजा दीक्षित ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, सही देखभाल और कुछ जरूरी उपाय अपनाकर पशुओं का दूध उत्पादन आसानी से बढ़ाया जा सकता है.

पशु स्वस्थ होगा तो दूध भी ज्यादा देगा

अगर दुधारू पशु स्वस्थ और ताकतवर होगा तो वह अधिक दूध देगा. इसके लिए जरूरी है कि पशु को संतुलित आहार, साफ पानी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच मिलती रहे. कई बार पशुपालक पशु की भूख कम होने या कमजोरी को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे दूध उत्पादन पर असर पड़ता है.

डी-वार्मिंग क्यों है जरूरी

डॉ. पूजा दीक्षित के अनुसार पशुओं में होने वाले ये कीड़े पशु के शरीर से पोषण को खा लेते हैं, जिससे पशु कमजोर होने लगता है. ये कीड़े पशुओं की आंतों में रहकर उनके द्वारा खाए गए चारे और पोषक तत्वों से अपना पोषण प्राप्त करते हैं, जिससे पशु को पूरा पोषण नहीं मिल पाता. यही कारण है कि समय-समय पर डिवार्मिंग (कृमिनाशक उपचार) कराना बेहद जरूरी होता है. डिवार्मिंग करने पर कीड़े पशु के शरीर से बाहर निकल जाते हैं, जिससे पशु द्वारा खाया गया आहार पूरी तरह उसके शरीर के विकास और दूध व अन्य उत्पादन पर लगने लगता है. इससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होता है और उत्पादन में भी वृद्धि देखने को मिलती है.

कितने समय पर दें दवा

एकसपर्ट के मुताबिक दुधारू पशुओं को हर तीन महीने में या जरूरत पड़ने पर एक महीने में भी कृमिनाशक दवा दी जा सकती है. आमतौर पर अल्बेंडाजोल (Albendazole) जैसी दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है. यह दवा नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाती है.

इस दवा को पशुओं को रोटी, आटा या पानी के साथ खिलाया जा सकता है. बड़े पशुओं के साथ-साथ छोटे बछड़ों को भी यह दवा दी जा सकती है, हालांकि उन्हें कम मात्रा में देना चाहिए.

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अगर पशु में पेट दर्द, कमजोरी, भूख कम लगना, अचानक वजन घटना, दस्त होना या मल में कीड़े दिखाई देना जैसे लक्षण दिखें तो यह संकेत हो सकता है कि डी-वार्मिंग की जरूरत है. ऐसे में तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है. दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को साफ और ताजा पानी देना चाहिए. इसके साथ हरी घास, भूसा और दाने का संतुलित आहार जरूरी है. पशु को खुला वातावरण और हल्की टहल भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है. कुछ पशुपालक सौंफ और गुड़ का पानी भी पशुओं को पिलाते हैं, जो पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है.

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