बारिश में बकरी पालन करते समय रहें सावधान, छोटी लापरवाही से हो सकता है बड़ा नुकसान
बरसात के मौसम में बकरियों में कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं. पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई, सूखा स्थान और संतुलित आहार देकर बकरियों को स्वस्थ रखा जा सकता है. सही देखभाल से किसान नुकसान से बच सकते हैं.
Goat Farming: बरसात का मौसम बकरी पालकों के लिए सबसे ज्यादा सतर्क रहने का समय होता है. इस मौसम में बढ़ी हुई नमी के कारण बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी तेजी से फैलते हैं, जिससे बकरियों में कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, यदि समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और संतुलित आहार का ध्यान रखा जाए, तो अधिकांश बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. थोड़ी सी लापरवाही भी पशुओं की सेहत और बकरी पालकों की आय पर भारी पड़ सकती है.
बरसात में तेजी से फैलती हैं ये खतरनाक बीमारियां
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, बारिश के मौसम में बकरियों में गला घोटू (HS), PPR, खुरपका, निमोनिया, दस्त, पेट के कीड़े और त्वचा संबंधी रोग तेजी से फैल सकते हैं. नमी अधिक होने से रोग फैलाने वाले जीवाणु और वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं. यदि समय पर इलाज और देखभाल नहीं की जाए, तो कई बार पशुओं की मौत भी हो सकती है. इसलिए बरसात शुरू होने से पहले ही बचाव के उपाय अपनाना जरूरी है.
बकरियों को हमेशा सूखी और ऊंची जगह पर रखें
विभाग की सलाह है कि बकरियों को कभी भी कीचड़, गड्ढों या पानी भरी जगह पर न बांधें. उनके रहने का स्थान ऊंचा, सूखा और हवादार होना चाहिए, ताकि बारिश का पानी जमा न हो. लगातार नमी रहने से बकरियों के खुर गल सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. पशुशाला की नियमित सफाई करें और गीला बिछावन तुरंत बदलें. साफ-सुथरा वातावरण पशुओं को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
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समय पर टीकाकरण और सही आहार है जरूरी
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, बरसात शुरू होने से पहले बकरियों का जरूरी टीकाकरण जरूर करा लेना चाहिए. इससे गला घोटू, PPR और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है. साथ ही हर 3 से 6 महीने पर पेट के कीड़ों की दवा भी देनी चाहिए. बारिश के दौरान हरा चारा कई बार फफूंद और परजीवियों से संक्रमित हो सकता है. इसलिए भीगा, सड़ा-गला या खराब चारा पशुओं को बिल्कुल न खिलाएं. संतुलित आहार के साथ सूखा चारा भी देना फायदेमंद रहता है.
छोटी सावधानियां बचा सकती हैं बड़ा नुकसान
पशुपालन विभाग का कहना है कि यदि किसान नियमित रूप से पशुओं की जांच करें, साफ पानी उपलब्ध कराएं और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें, तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है. बरसात के मौसम में बकरी पालन में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है. वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करने पर पशु स्वस्थ रहते हैं, मृत्यु दर कम होती है और बकरी पालन किसानों के लिए अधिक लाभदायक व्यवसाय बना रहता है.