chana price below MSP: रबी सीजन की नई फसल मंडियों में पहुंचते ही चने के बाजार का मिजाज बदल गया है. जहां कुछ महीने पहले तक चने के भाव मजबूत बने हुए थे, वहीं अब कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. हालात ऐसे हैं कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसी बड़ी उत्पादक मंडियों में चना सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी नीचे बिक रहा है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.
क्यों टूट रहे हैं चने के दाम?
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार चने की फसल अच्छी मानी जा रही है. बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रहा और मौसम भी अनुकूल रहा. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 9 फरवरी तक चने की बुवाई 96.20 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 91.22 लाख हेक्टेयर थी. यानी करीब 5.45 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
उम्मीद की जा रही है कि उत्पादन ज्यादा होगा, इसलिए बाजार में पहले से ही दबाव दिखने लगा है. जैसे-जैसे नई फसल की आवक बढ़ रही है, वैसे-वैसे दाम नरम होते जा रहे हैं.
MSP से नीचे पहुंचा भाव
सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए चने का MSP 5,875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. लेकिन मंडियों में अभी औसत थोक भाव 5,400 रुपये के आसपास चल रहे हैं. 2 फरवरी को जहां औसत भाव 5,621 रुपये प्रति क्विंटल थे, वहीं 9 फरवरी तक यह गिरकर 5,396 रुपये रह गए. कई जगह किसान 54-55 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक्री कर रहे हैं, जो MSP से कम है.
आयात का भी पड़ रहा असर
चने की कीमतों पर विदेशी आयात का भी असर दिख रहा है. इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के मानद सचिव सतीश उपाध्याय के मुताबिक पिछले 15 दिनों में ही दाम 10 से 15 प्रतिशत तक गिर चुके हैं.
मिल मालिक बंदरगाहों पर उपलब्ध आयातित चना खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. तंजानिया का चना मुंबई पोर्ट पर लगभग 5,300 रुपये प्रति क्विंटल और ऑस्ट्रेलिया का चना 5,424 रुपये प्रति क्विंटल में मिल रहा है. मुंद्रा और कांडला पोर्ट पर भी ऑस्ट्रेलियाई चना 5,350 से 5,375 रुपये के बीच उपलब्ध है. व्यापारियों का कहना है कि विदेशी चने का रंग, आकार और दाल की रिकवरी बेहतर होती है, इसलिए मिलें उसे प्राथमिकता दे रही हैं.
बंदरगाहों पर पड़ा है भारी स्टॉक
अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच भारत ने करीब 10 लाख टन चना आयात किया है. अभी भी बंदरगाहों पर करीब 3.5 लाख टन ऑस्ट्रेलियाई चना पड़ा है और कुछ जहाज और आने वाले हैं. ऐसे में घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
सरकारी खरीद से उम्मीद
कर्नाटक में इस समय चने की आवक सबसे ज्यादा है और महाराष्ट्र में भी तेजी से बढ़ रही है. लेकिन मांग कमजोर होने के कारण दाम संभल नहीं पा रहे. व्यापारियों का मानना है कि जब तक सरकार बड़े पैमाने पर MSP पर खरीद शुरू नहीं करेगी, तब तक किसानों को राहत मिलना मुश्किल है. हालांकि, केंद्र ने कर्नाटक में 1.01 लाख टन चने की MSP पर खरीद को मंजूरी दी है, जिससे कुछ राहत की उम्मीद है.