Dry fruit containers detained: मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर कस्टम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सूखे मेवों से लदे एक जहाज को रोक लिया है. कोमोरोस झंडे वाला जहाज ‘WIV Reyfa’ करीब 309 कंटेनर लेकर आया था. ये कंटेनर ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से लोड किए गए थे. शक है कि इन कंटेनरों में भरे सूखे मेवे, खासकर अखरोट, को अफगानिस्तान का बताकर भारत में शून्य आयात शुल्क का फायदा उठाने की कोशिश की गई.
DRI की सूचना के बाद हुई कार्रवाई
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) को पहले से इस खेप को लेकर खास सूचना मिली थी. इसी आधार पर मुंबई कस्टम कमिश्नर को पत्र भेजा गया और जहाज को करीब दो हफ्तों से बंदरगाह पर रोके रखा गया है. जांच में यह सामने आया है कि माल का वास्तविक स्रोत अफगानिस्तान नहीं, बल्कि किसी और देश से है.
केंद्रीय खुफिया इकाई (CIU) के सर्कुलर के अनुसार, इस मामले में अब तक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जांच में लगभग 50 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी चोरी का खुलासा हुआ है.
कैसे रचा गया पूरा खेल?
जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ आयातकों ने दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता (SAFTA) के तहत मिलने वाले शून्य आयात शुल्क का लाभ लेने के लिए माल का देश गलत बताया. चूंकि अफगानिस्तान स्थल-रुद्ध देश है और उसके सामान को दूसरे बंदरगाहों से होकर आना पड़ता है, इसी स्थिति का फायदा उठाया गया.
बताया जा रहा है कि बंदर अब्बास से माल को जिबेल अली (यूएई) तक ले जाने के फर्जी ट्रांजिट दस्तावेज तैयार किए गए. नकली बिल ऑफ लैडिंग और ट्रांजिट कागजात तैयार कर यह दिखाया गया कि माल अफगानिस्तान से आया है. इन दस्तावेजों को ई-संचित पोर्टल पर अपलोड कर एक कृत्रिम दस्तावेजी श्रृंखला तैयार की गई, ताकि कस्टम अधिकारियों को भ्रमित किया जा सके.
शून्य शुल्क का लाभ उठाने की कोशिश
भारत में जब यह जहाज जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर पहुंचा तो कस्टम हाउस में बिल ऑफ एंट्री दाखिल कर SAFTA के तहत शून्य ड्यूटी का दावा किया गया. इसके लिए कंट्री ऑफ ओरिजिन (COO) सर्टिफिकेट और ट्रांजिट दस्तावेज पेश किए गए. लेकिन जांच में इन दस्तावेजों में कई खामियां और गड़बड़ियां सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि जानबूझकर रिकॉर्ड में हेरफेर की गई है.
आयातकों पर बढ़ा दबाव
मामले के सामने आने के बाद कस्टम विभाग ने संबंधित आयातकों से आयात मूल्य के बराबर बैंक गारंटी मांगी है. दूसरी ओर, एक आयातक ने इस कार्रवाई के खिलाफ मुंबई हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है.
सूखे मेवे के कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर यह मामला सही साबित होता है तो इससे बाजार पर भी असर पड़ सकता है. भारत में अखरोट और अन्य ड्राई फ्रूट की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में गलत तरीके से आयात किए गए सस्ते माल से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान हो सकता है.
फिलहाल जहाज और कंटेनर कस्टम की निगरानी में हैं और विस्तृत जांच जारी है. अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच और संबंधित पक्षों से पूछताछ के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी.