छोटी लापरवाही से पशुओं में फैल सकता है ब्रुसेलोसिस रोग, बिहार सरकार ने की एडवाइजरी

Brucellosis: बिहार सरकार के पशुपालन निदेशालय ने पशुपालकों को ब्रुसेलोसिस रोग से सतर्क रहने की सलाह दी है. विभाग ने साफ-सफाई, समय पर डॉक्टर से संपर्क और सावधानी बरतने पर जोर दिया है. छोटी लापरवाही से पशुओं के साथ इंसानों पर भी खतरा बढ़ सकता है, इसलिए जागरूकता और बचाव इस समय सबसे जरूरी माना जा रहा है.

नोएडा | Updated On: 10 Apr, 2026 | 07:42 PM

Bihar Animal Husbandry: गांवों में पशुपालन सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि परिवार की रोजी-रोटी और आर्थिक सहारा होता है. ऐसे में अगर कोई संक्रामक बीमारी पशुओं को घेर ले, तो इसका असर सीधे किसान और पशुपालक की कमाई पर पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत पशुपालन निदेशालय ने ब्रुसेलोसिस रोग से बचाव को लेकर जरूरी सामान्य सुझाव जारी किए हैं. विभाग ने साफ कहा है कि समय रहते सावधानी बरतने से इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है और पशुओं के साथ-साथ इंसानों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है.

लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

पशुपालन निदेशालय ने पशुपालकों को सलाह दी है कि अगर किसी पशु में बीमारी  के लक्षण नजर आएं, तो बिना देर किए तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. कई बार पशु अचानक कमजोर दिखने लगता है, बार-बार बुखार जैसा लगता है, दूध कम देने लगता है या गर्भपात जैसी समस्या सामने आती है. ऐसे संकेतों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. विभाग का कहना है कि शुरुआती समय में डॉक्टर की सलाह मिलने से बीमारी पर जल्दी काबू पाया जा सकता है. इससे दूसरे पशुओं में संक्रमण फैलने का खतरा भी काफी कम हो जाता है. ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग घरेलू इलाज पर भरोसा कर लेते हैं, लेकिन ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारी में ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है.

बाड़े की सफाई और दवा का छिड़काव है बेहद जरूरी

विभाग ने साफ निर्देश दिया है कि अगर कोई पशु बीमार पाया जाता है, तो उसके बाड़े को तुरंत जीवाणुरहित करना चाहिए. इसके लिए जीवाणुनाशक दवा का छिड़काव  सबसे जरूरी कदम माना गया है. पशु जहां बैठता है, खाता है या आराम करता है, वहां बीमारी के जीवाणु लंबे समय तक बने रह सकते हैं. अगर बाड़े की समय पर सफाई नहीं की गई, तो दूसरे स्वस्थ पशु भी आसानी से संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं. इसलिए फर्श, दीवार, पानी पीने की जगह और चारे के बर्तन तक को साफ करना जरूरी है. बिहार सरकार के पशुपालन विभाग ने कहा है कि नियमित सफाई और दवा का छिड़काव पशुओं की सुरक्षा का सबसे आसान और असरदार तरीका है.

मृत पशु या गर्भपात के बाद निकले पदार्थों को ऐसे न छोड़ें

ब्रुसेलोसिस बीमारी में सबसे बड़ा खतरा संक्रमित द्रव्यों से होता है. इसलिए विभाग ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि मृत पशु या गर्भपात  के बाद निकले सभी द्रव्यों को खुले में बिल्कुल न छोड़ें. इन्हें या तो जला देना चाहिए या फिर चूना डालकर गहरी जमीन में गाड़ देना चाहिए. गांवों में कई बार ऐसे पदार्थ खुले में फेंक दिए जाते हैं, जिससे दूसरे पशु और आसपास का वातावरण संक्रमित हो सकता है. इससे बीमारी तेजी से फैलती है. विभाग का कहना है कि यह छोटी सी लापरवाही पूरे पशुबाड़े को प्रभावित कर सकती है. इसलिए हर पशुपालक को इस नियम का सख्ती से पालन करना चाहिए.

पशु को छूने से पहले और बाद में हाथ जरूर साफ करें

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग  ने यह भी बताया है कि यह बीमारी पशुओं से इंसानों तक भी पहुंच सकती है. इसलिए पशु के संपर्क में आने से पहले और बाद में हाथों को एंटीसेप्टिक या साबुन से अच्छी तरह साफ करना बेहद जरूरी है. खासकर बीमार पशु, गर्भपात वाले पशु या नवजात की देखभाल करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. पशुपालकों, डेयरी कर्मियों और खेत में काम करने वाले लोगों को हाथ धोने की आदत जरूर अपनानी चाहिए. इससे संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. विभाग ने इसे परिवार और पशुधन दोनों की सुरक्षा से जुड़ा जरूरी कदम बताया है.

बिहार सरकार के पशुपालन निदेशालय की यह सलाह पशुपालकों के लिए बेहद काम की है. ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारी से बचाव इलाज से ज्यादा आसान है. अगर समय पर डॉक्टर की सलाह, बाड़े की सफाई, संक्रमित पदार्थों का सही निपटान और हाथों की सफाई जैसी बातों का ध्यान रखा जाए, तो पशु स्वस्थ रहेंगे और पशुपालकों की आय भी सुरक्षित रहेगी. छोटे-छोटे सावधानी भरे कदम ही बड़े नुकसान से बचाने का सबसे मजबूत रास्ता हैं.

Published: 10 Apr, 2026 | 10:22 PM

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