क्लाइमेट चेंज का असर! हरियाणा में घट रहा भैंसों का दूध उत्पादन, डेयरी किसानों की बढ़ी चिंता

एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में, खासकर हरियाणा में भैंसों का दूध उत्पादन घट रहा है. बढ़ते तापमान और बदलते मौसम का असर डेयरी पशुओं की उत्पादकता पर पड़ रहा है. इससे किसानों की आय, दूध की उपलब्धता और भविष्य में उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है.

नोएडा | Updated On: 9 Jul, 2026 | 12:20 PM

Milk Production Decline: भारत में दूध उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखाई देने लगा है. एक नए अध्ययन के अनुसार, बढ़ते तापमान और बदलते मौसम के कारण खासकर भैंसों का दूध उत्पादन घट रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर हरियाणा पर देखा गया है, जो देश के प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों में शामिल है. साइंटिफिक रिपोर्ट्स पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, बढ़ते तापमान और बदलते मौसम का डेयरी पशुओं पर सीधा असर पड़ रहा है. इससे दूध देने वाले पशुओं की उत्पादकता कम हो रही है.

अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन का असर दुनिया भर में पशुपालन पर पड़ रहा है, लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों में यह समस्या अधिक गंभीर है.  खासतौर पर हरियाणा जैसे अधिक दूध उत्पादन वाले क्षेत्रों में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जलवायु परिवर्तन का असर इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका प्रभाव न केवल डेयरी किसानों की आय पर पड़ेगा, बल्कि रोजमर्रा के उपभोक्ताओं तक दूध की उपलब्धता और कीमतों पर भी पड़ सकता है.

2004 से 2019 के बीच के आंकड़ों का अध्ययन किया

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है. इसी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने हरियाणा में 2004 से 2019 के बीच के आंकड़ों का अध्ययन किया. इस दौरान उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि बदलते मौसम का दूध उत्पादन पर कितना असर पड़ रहा है. अध्ययन में न्यूनतम, अधिकतम और औसत तापमान, भारी बारिश, तापमान-आर्द्रता सूचकांक (THI) और वाष्पोत्सर्जन (Evapotranspiration) जैसे मौसम से जुड़े कारकों का विश्लेषण किया गया. साथ ही भैंस, देशी गाय और संकर (क्रॉसब्रीड) गायों के दूध उत्पादन के आंकड़ों की भी जांच की गई. शोध में पाया गया कि बढ़ते तापमान और मौसम में बदलाव का डेयरी पशुओं के दूध उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है.

हरियाणा में देशी गायों की संख्या लगातार बढ़ रही

हालांकि इन चिंताओं के बीच हरियाणा में देशी गायों की संख्या लगातार बढ़ रही है. बीते अप्रैल महीने में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राज्यसभा में बताया था कि 19वीं और 20वीं पशुधन जनगणना के बीच राज्य में देशी और अवर्गीकृत मवेशियों की संख्या 8,12,013 से बढ़कर 9,49,541 हो गई है. यानी इसमें करीब 16.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

अब तक 113.60 करोड़ रुपये की मिली केंद्रीय सहायता

मंत्री ने बताया कि हरियाणा राष्ट्रीय गोकुल मिशन से जुड़ा हुआ है. इस योजना के तहत राज्य को अब तक 113.60 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी गई है. इस राशि का उपयोग देशी नस्ल के दुधारू पशुओं के संरक्षण, नस्ल सुधार, दूध उत्पादन बढ़ाने और जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित करने में किया जा रहा है. राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य किसानों को घर के पास ही बेहतर गुणवत्ता वाली कृत्रिम गर्भाधान (AI) सुविधा उपलब्ध कराना है. सरकार के अनुसार, हरियाणा में अब तक 9.41 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं. इससे 6.36 लाख पशुओं को लाभ मिला है और करीब 4.7 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित हुए हैं.

Published: 9 Jul, 2026 | 12:12 PM

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