पशुओं में दस्त और बुखार को न करें नजरअंदाज, ये गंभीर संक्रमण का हो सकता संकेत
पशुओं में फैलने वाली सोल्मोनेलोसिस बीमारी धीरे-धीरे पूरे फार्म को प्रभावित कर सकती है. इससे दूध उत्पादन घटता है और इंसानों के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ सकता है. साफ-सफाई, सही देखभाल और समय पर उपचार से इस संक्रमण से बचाव संभव है. पशुपालकों को जागरूक रहकर पशुओं की नियमित निगरानी करना जरूरी होता है.
Animal Health: पशुपालन में अक्सर लोग दूध उत्पादन, चारा और नस्ल सुधार पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार छोटी-सी लापरवाही बड़ी बीमारी का कारण बन जाती है. ऐसी ही एक खतरनाक बीमारी है सोल्मोनेलोसिस, जो पशुओं के साथ-साथ इंसानों के लिए भी जोखिम बन सकती है. यह बीमारी तेजी से फैलती है और पूरे पशु फार्म को प्रभावित कर सकती है. अगर समय रहते इसके लक्षण पहचान लिए जाएं और सही बचाव किया जाए, तो पशुओं की सेहत और पशुपालकों की आमदनी दोनों सुरक्षित रह सकती हैं.
बीमारी क्या है और कैसे फैलती है
सोल्मोनेलोसिस एक संक्रामक रोग है, जो बैक्टीरिया के कारण फैलता है. यह बैक्टीरिया पशुओं के पाचन तंत्र को प्रभावित करता है. संक्रमण आमतौर पर गंदे पानी, दूषित चारे, गोबर या संक्रमित पशु के संपर्क से फैलता है. अगर फार्म में साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में बहुत जल्दी फैल सकती है. खासकर छोटे बछड़े और कमजोर पशु इसकी चपेट में जल्दी आते हैं.
पशुओं में दिखने वाले लक्षण
इस बीमारी के कुछ सामान्य लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं. संक्रमित पशु को तेज बुखार आ सकता है और वह सुस्त दिखाई देता है. कई बार पतले दस्त या खूनी दस्त की समस्या भी होती है. पशु के पेट में दर्द रहता है और वह सामान्य से कम खाना खाता है. दूध देने वाले पशुओं में दूध उत्पादन अचानक कम हो जाता है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो पशु बहुत कमजोर हो सकता है और स्थिति गंभीर बन सकती है.
इंसानों के लिए भी खतरा
यह बीमारी सिर्फ पशुओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इंसानों तक भी पहुंच सकती है. संक्रमित पशु के गोबर, पानी या दूषित चीजों के संपर्क में आने से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. इंसानों में यह संक्रमण पेट से जुड़ी समस्याएं, बुखार और टाइफाइड जैसे लक्षण पैदा कर सकता है. इसलिए पशुओं की देखभाल करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. पशुओं को छूने या उन्हें खाना खिलाने के बाद हाथ धोना बहुत जरूरी होता है.
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
सोल्मोनेलोसिस से बचने के लिए फार्म की स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण है. पशुओं को हमेशा साफ पानी और ताजा चारा देना चाहिए. बीमार पशु को तुरंत अलग रखना चाहिए ताकि संक्रमण न फैले. अगर नया पशु खरीदा जाए, तो उसे कुछ दिनों तक अलग रखकर उसके स्वास्थ्य पर नजर रखनी चाहिए. किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है. सही देखभाल, साफ-सफाई और समय पर उपचार से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है. जागरूकता ही पशुओं की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन की सबसे बड़ी कुंजी है.