छुट्टा गोवंश को मिलेगा सुकून.. 18 नए गो संरक्षण केंद्र खुले, 7400 पशुओं को मिला घर

उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. 14 जिलों में 18 नए गो संरक्षण केंद्र शुरू हुए हैं. इनसे हजारों निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा. सरकार का लक्ष्य सड़कों पर भटकते पशुओं को राहत देना और ग्रामीण इलाकों में व्यवस्था बेहतर बनाना है, ताकि किसान और पशु दोनों सुरक्षित रहें.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 23 Jan, 2026 | 07:25 PM

Cow Shelter : सड़कों पर भटकते गोवंश, किसानों की फसलों को नुकसान और खुद पशुओं की बदहाल स्थिति-यह तस्वीर अब धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है. उत्तर प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण को लेकर लगातार कदम उठा रही है. इसी कड़ी में प्रदेश को एक बड़ी सौगात मिली है. पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने 14 जिलों में बने 18 नए वृहद गो संरक्षण केंद्रों का लोकार्पण किया है. इन केंद्रों के शुरू होने से हजारों निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा और ग्रामीण इलाकों में राहत पहुंचेगी.

18 नए गो संरक्षण केंद्र, 7400 गोवंश को मिलेगा आश्रय

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए 14 जिलों में तैयार 18 वृहद गो संरक्षण केंद्रों का उद्घाटन किया गया. इन केंद्रों में करीब 7400 निराश्रित गोवंश को रखने की व्यवस्था की गई है. अलग-अलग जिलों में बने इन केंद्रों से न केवल पशुओं को सुरक्षित ठिकाना  मिलेगा, बल्कि सड़कों और खेतों में होने वाली समस्याओं से भी निजात मिलेगी. सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी गोवंश बेसहारा न रहे.

निर्माण की गुणवत्ता पर सख्त निर्देश

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि बाकी बचे गो संरक्षण  केंद्रों का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए. उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए. साथ ही, गो संरक्षण के कार्यों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, ताकि इन केंद्रों का बेहतर संचालन हो सके.

प्रदेश में चल रहे सैकड़ों गो आश्रय स्थल

मंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में अब तक सैकड़ों वृहद गो संरक्षण केंद्रों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से बड़ी संख्या में केंद्र बनकर तैयार हो चुके हैं और संचालन भी शुरू हो गया है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों  में अस्थायी गो आश्रय स्थल, कांजी हाउस और शहरी क्षेत्रों में कान्हा गो आश्रय स्थल भी संचालित किए जा रहे हैं. इन सभी जगहों पर लाखों निराश्रित गोवंश को संरक्षण दिया जा रहा है. सरकार हर दिन गोवंश के संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.

गो आश्रय स्थल बनेंगे आत्मनिर्भर

गो संरक्षण केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार नई पहल कर रही है. गोबर से दीये, धूपबत्ती, गमले, वर्मी कम्पोस्ट और बायोगैस जैसी इकाइयां स्थापित की जा रही हैं. इससे एक ओर जहां पर्यावरण को फायदा  मिलेगा, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को रोजगार भी मिलेगा. इससे गो आश्रय स्थल केवल खर्च का केंद्र नहीं, बल्कि आय का साधन भी बनेंगे.

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