Onion Farming: महाराष्ट्र के किसान अब बढ़ते मजदूर खर्च और पीक सीजन में श्रमिकों की कमी को देखते हुए प्याज रोपाई के लिए मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. पुणे जिले के जुन्नर तालुका में ये मशीनें तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं, जिससे समय और पैसे की बचत के साथ फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है. प्याज की रोपाई परंपरागत रूप से सबसे मेहनत मांगने वाले कामों में से एक है. आम तौर पर एक एकड़ में 20-22 मजदूरों की जरूरत होती है और मजदूरी, ट्रांसपोर्ट व खाने-पीने के खर्च मिलाकर 18,000 से 20,000 रुपये खर्च होते हैं. लेकिन मजदूरों की कमी के कारण समय पर रोपाई नहीं हो पाती और पैदावार पर असर पड़ता है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अब मशीनों के इस्तेमाल से स्थिति बदल गई है. किसान सिर्फ पांच मजदूर और एक ट्रैक्टर ड्राइवर के साथ प्रति एकड़ रोपाई 10,000 से 12,000 रुपये में कर सकते हैं. ऐसे में समय भी काफी घट जाता है, जिससे अधिक जमीन पर जल्दी और कुशलता से काम किया जा सकता है. नरायणगांव के पास हिरडेवाडी गांव के किसान भालचंद्र खोकरले ने कहा कि पहले मजदूरों की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती होती थी. पैसे होने के बावजूद समय पर मजदूर नहीं मिलते थे. अब मशीन से रोपाई तेज और समान होती है, जिससे तनाव और खर्च दोनों कम हो गए हैं.
फसल स्वस्थ और अधिक पैदावार होती है
किसानों के अनुसार, मशीन की सबसे बड़ी खासियत है समान रोपाई. यह बीज लगाते समय पौधों को बराबर गहराई और दूरी पर लगाती है, जिससे जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं और प्याज के बल्ब का आकार भी समान रहता है. समान रोपाई से सिंचाई, उर्वरक और खरपतवार नियंत्रण भी आसान हो जाता है. जुन्नर तालुका के किसान दीपक उकिर्दे ने कहा कि मैनुअल रोपाई में दूरी अलग-अलग होती थी और विकास प्रभावित होता था. मशीन से हर पौधे को बराबर जगह और पोषण मिलता है, जिससे फसल स्वस्थ और अधिक पैदावार देती है.
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एक एकड़ में 15 टन प्याज का उत्पादन
स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मशीन से रोपाई से प्रति एकड़ पौधों की संख्या सही रहती है और कुल उत्पादन बढ़ता है. समान पंक्तियों से ड्रिप या फ्लड सिंचाई भी आसानी से नियंत्रित की जा सकती है. राज्य कृषि अधिकारियों के मुताबिक, मशीन से रोपाई की गई एक एकड़ फसल से लगभग 15 टन प्याज तक उत्पादन हो सकता है, किस्म और खेती के तरीके पर निर्भर करता है.
मजदूरों पर निर्भरता भी कम करता है
मशीन का इस्तेमाल मौसमी और भरोसेमंद नहीं रहने वाले मजदूरों पर निर्भरता भी कम करता है. किसान रमेश बांगर ने बताया कि पहले एक एकड़ में मैनुअल रोपाई में करीब 20 घंटे और बड़ी संख्या में मजदूर लगते थे. महाराष्ट्र जैसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य में मशीनों का बढ़ता उपयोग भविष्य में प्याज की खेती को और अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकता है. किसान कार्यकर्ता शांताराम सर्वदे ने कहा कि जैसे-जैसे अधिक किसान इसके आर्थिक और कृषि लाभ देखेंगे, मशीनरी खेती में अहम भूमिका निभाएगी.