Fish Production: मछली उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ेगा भारत, घरेलू मछली पालकों के लिए फ्रेमवर्क तैयार
India Fish Production: देश के मछली पालकों की वित्तीय जरूरत पूरी करने के लिए केंद्र ने कमर कस ली है. 4.76 लाख मछलीपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 3 हजार करोड़ रुपये दिए गए. मछली उत्पादन दोगुने के पार पहुंचा अब चीन को पीछे करने की तैयारी.
Fish Production: देश में तेजी से मछली पालन व्यवसाय का रूप ले रहा है. वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश चीन है. चीन को मछली उत्पादन में पीछे करने के लिए भारतीय मछली पालकों में कमर कस ली है. इसके लिए सरकार की ओर से चलाई जा रहीं योजनाओं का लाभ मछली पालक उठा रहे हैं. मछली पालन शुरू करने के लिए 4.76 लाख लोगों ने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 3214 करोड़ रुपये उठाए हैं. इसकी वजह से भारत का मछली उत्पादन आंकड़ा भी दोगुने के पार पहुंच गया है.
केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार मत्स्य पालन के लिए वित्तीय जरूर पूरी करने के इरादे से वर्ष 2018-19 में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) शुरू किया गया था. केसीसी योजना के तहत जून 2025 तक 4.76 लाख से ज्यादा मछली पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं. इसके तहत मछली पालकों को 3,214.32 करोड़ रुपये की लोन राशि भी वितरित की गई है. केसीसी के जरिए मछली पालकों को केवल 4 फीसदी ब्याज का भुगतान करना पड़ा है. जबकि, बाकी 3 फीसदी मंत्रालय ने वहन किया है.
मछली पालकों की वित्तीय मदद दे के लिए 7,522.48 करोड़ का फंड
मछली पालकों को वित्तीय मदद दे के लिए 7,522.48 करोड़ रुपये के फंड बनाया गया है. मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) के तहत फिश फार्मर्स को 3 फीसदी ब्याज सब्सिडी दी जा रही है. मंत्रालय ने इस कोष के तहत 6,369 करोड़ रुपये से अधिक राशइ वाले 178 प्रस्तावों को जुलाई 2025 तक मंजूरी दे दी है. जबकि, अब फिर से फिश फार्मिंग शुरू करने के लिए तेजी से किसानों के आवेदन मंत्रालय को मिल रहे हैं.
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आवेदकों को 5 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही
प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत लोन राशि पाने के लिए आवेदकों की मदद के लिए दस्तावेजीकरण और प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया गया है. मछली पालकों को लोन आवेदन मंजूरी देने के बाद प्रोत्साहन राशि के रूप में 5,000 रुपये तक का एकमुश्त भुगतान भी किया जा रहा है. राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोन पाने की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है, जिसमें अब 12 राष्ट्रीय बैंकों को शामिल किया गया है. इससे आवेदक मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से दूर से ही ऋण आवेदन जमा कर सकते हैं, अवधि और ऋण का उद्देश्य चुन सकते हैं. इस प्लेटफॉर्म ने पहले ही हजारों ऋण आवेदनों को स्वीकृत किया है.
19 हजार से ज्यादा मछलीपालकों ने भेजे आवेदन
अब मछलीपालक घर बैठे ही राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म क्रेडिट मॉड्यूल के तहत बैंक में ऋण आवेदन जमा कर सकते हैं. राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के तहत बीते कुछ समय में 19 हजार से अधिक लाभार्थियों ने आवेदन जमा किए हैं. आवेदकों को 15 हजार रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की लोन राशि को मंजूरी दी जा रही है. इस प्रक्रिया से छोटे मछली पालकों को फायदा पहुंच रहा है.
मछली उत्पादन में कौन सा देश सबसे आगे, भारत का नंबर कौन सा
दुनियाभर में चीन मछली उत्पादन में प्रथम स्थान पर है. चीन वैश्विक उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा उत्पादन करता है. सालाना करीब 560 लाख टन से ज्यादा मछली का उत्पादन होता है.
वहीं, भारत ने नीली क्रांति के जरिए मछली उत्पादन में तेजी से पकड़ मजबूत की है. भारत आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है और वैश्विक मछली उत्पादन का लगभग 8 फीसदी हिस्सा है. केंद्रीय मंत्रालय के अनुसार 2024-25 में मछली उत्पादन 197 लाख टन तक पहुंच गया जो वर्ष 2013-14 में 95.79 लाख टन से लगभग दोगुना है.