Fish Farming: महंगा फिश फीड खरीदने से छुटकारा, मशीन से घर पर बनाएं सस्ता और पौष्टिक चारा
मछली पालन में महंगे चारे की समस्या से परेशान किसानों के लिए फिश फीड मशीन एक बेहतर विकल्प बन रही है. इस मशीन से घर पर ही सस्ता और पौष्टिक चारा तैयार किया जा सकता है. इससे लागत घटती है, मछलियों की बढ़त तेज होती है और मुनाफा बढ़ाने का नया रास्ता खुलता है.
Fish Farming: मछली पालन करने वाले किसान अक्सर एक ही परेशानी से जूझते हैं-महंगा चारा. जितना अच्छा चारा, उतनी तेजी से मछलियों की बढ़त और उतनी ही अच्छी कीमत बाजार में मिलती है. लेकिन बाजार से महंगा फिश फीड खरीदना हर किसान के बस की बात नहीं. ऐसे में अब एक स्मार्ट तरीका सामने आया है, जिससे किसान घर पर ही सस्ता और पौष्टिक चारा तैयार कर सकते हैं और अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं.
क्या है फिश फीड मशीन?
फिश फीड मेकिंग मशीन एक ऐसी मशीन है, जो अलग-अलग कच्चे माल को मिलाकर मछलियों के लिए तैयार चारा बनाती है. इसमें चावल की भूसी, मक्का, सोयाबीन, सरसों खली, मछली चूरा और जरूरी पोषक तत्व मिलाए जाते हैं. मशीन इन सबको अच्छे से पीसकर और मिलाकर दाने के रूप में तैयार कर देती है. सबसे अच्छी बात यह है कि किसान चाहें तो इन कच्चे माल का उत्पादन खुद भी कर सकते हैं. इससे चारे की लागत और कम हो जाती है. यानी खर्च भी कम और फायदा भी ज्यादा.
कैसे काम करती है यह मशीन?
इस मशीन का इस्तेमाल करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. सबसे पहले तय मात्रा में कच्चा माल मशीन में डाला जाता है. मशीन उसे ग्राइंड करती है और फिर अच्छी तरह मिक्स करती है. इसके बाद वह मिश्रण को दाने या पेलेट के रूप में बाहर निकाल देती है. मछलियों की उम्र और नस्ल के हिसाब से फीड तैयार किया जाता है. दो तरह का फीड ज्यादा चलता है-
- फ्लोटिंग फीड:- जो पानी के ऊपर तैरता है.
- सिंकिंग फीड:- जो पानी में नीचे चला जाता है.
किसान अपनी जरूरत के हिसाब से फीड का प्रकार चुन सकते हैं. सही फीड देने से मछलियों का वजन तेजी से बढ़ता है और उनकी सेहत भी अच्छी रहती है.
क्या है कीमत और कैसे मिलेगी राहत?
फिश फीड मशीन की कीमत उसकी क्षमता और प्रकार पर निर्भर करती है. छोटे स्तर की मशीनें करीब 50,000 रुपये से शुरू हो जाती हैं. वहीं बड़ी और ऑटोमेटिक मशीनें 1.5 लाख रुपये या उससे ज्यादा की हो सकती हैं. मशीन दो तरह की होती है-
- हाथ से चलने वाली
- ऑटोमेटिक मशीन
अगर किसान ज्यादा उत्पादन करना चाहते हैं तो ऑटोमेटिक मशीन फायदेमंद रहती है. कई राज्यों में सरकार की योजनाओं के तहत इस मशीन पर सब्सिडी भी मिलती है. इससे छोटे किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है.
क्या हैं इसके फायदे?
फिश फीड मशीन लगाने से किसानों की बाजार पर निर्भरता कम हो जाती है. उन्हें हर बार महंगा चारा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. खुद चारा बनाकर वे लागत घटा सकते हैं. इसके अलावा अगर किसान चाहें तो अतिरिक्त फीड बनाकर बेच भी सकते हैं. इससे उनकी कमाई का एक नया रास्ता खुल सकता है. अच्छी क्वालिटी का चारा देने से मछलियों की ग्रोथ तेज होती है, वजन बढ़ता है और बाजार में बेहतर दाम मिलता है. आज के समय में जब हर चीज महंगी हो रही है, ऐसे में यह मशीन मछली पालकों के लिए एक समझदारी भरा कदम साबित हो सकती है. कम खर्च, ज्यादा मुनाफा और आत्मनिर्भरता-तीनों का संतुलन यही तकनीक बना सकती है.