Godhan Samagam 2026: 112 दुग्ध उत्पादक को गोधन समागम 2026 में किया गया सम्मानित, मिला नकद इनाम
Godhan Smangam Lucknow 2026: इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित गोधन समागम-2026 में उत्तर प्रदेश के 112 दुग्ध उत्पादकों को गोकुल और नन्दबाबा पुरस्कार से सम्मानित किया गया. लाखों रुपये की पुरस्कार राशि के साथ किसानों को प्रोत्साहित किया गया. यूपी वर्तमान में देश में दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है और सरकार इसे बनाए रखने के लिए नई योजनाएं चला रही है.
Godhan Samagam 2026: इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित गोधन समागम-2026 कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 112 दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित किया गया. इस कार्यक्रम में उन किसानों को दिया गया, जिन्होंने साल 2024-25 में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन और आपूर्ति की. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्रोत्साहित करना और उनके काम की सराहना करना था. साथ ही कार्यक्रम में किसानों को प्रतीक चिन्ह, प्रमाण-पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया.
गोकुल और नन्दबाबा पुरस्कार से सम्मान
इस कार्यक्रम में 63 दुग्ध उत्पादकों को गोकुल पुरस्कार दिया गया. यह पुरस्कार उन किसानों को मिला जिन्होंने सबसे अधिक दूध आपूर्ति की.
- लखीमपुर-खीरी के वरुण सिंह को 1,81,272 लीटर दूध आपूर्ति के लिए राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार मिला. उन्हें 2 लाख रुपये की धनराशि दी गई.
- आगरा के वीरेन्द्र सिंह को 1,10,693 लीटर दूध आपूर्ति के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला और 1.50 लाख रुपये पुरस्कार में दिए गए.
- अन्य जिला स्तरीय विजेताओं को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई.
इसके अलावा 49 किसानों को नन्दबाबा पुरस्कार दिया गया, जो गाय से सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वालों को मिला.
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रामपुर के अरुण कुमार को 19,066 लीटर दूध उत्पादन के लिए राज्य स्तरीय सम्मान और 51 हजार रुपये की राशि दी गई. अन्य जिला स्तरीय लाभार्थियों को 21 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया. कुल 112 सम्मानित किसानों में 25 महिलाएं भी शामिल रहीं, जो यह दिखाता है कि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है.
गोसंरक्षण में बेहतर कार्य करने वाले जिले सम्मानित
निराश्रित गोवंश की देखभाल और संरक्षण में अच्छा कार्य करने वाले पांच जिलों – हरदोई, अलीगढ़, अमरोहा, जालौन और रायबरेली के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) को भी प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया.
दुग्ध नीति 2022 से बढ़ा निवेश
उत्तर प्रदेश में दुग्ध उद्योग को बढ़ावा देने के लिए दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति 2022 लागू की गई है.
- इस नीति के तहत 550 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है.
- रोजाना 39 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ी है.
- लगभग 1500 लोगों को रोजगार मिला है.
- पूंजी निवेश पर 35% तक अनुदान (अधिकतम 5 करोड़ रुपये) दिया जा रहा है.
- वर्ष 2026-27 के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है.
नन्द बाबा दुग्ध मिशन से किसानों को लाभ
प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाए रखने के लिए नन्द बाबा दुग्ध मिशन चलाया जा रहा है. इसके तहत कई योजनाएं संचालित हैं:
- नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना (25 गाय)
- मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना (10 गाय)
- मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना (2 गाय)
- मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना
इन योजनाओं के तहत अब तक 10,000 पशुपालकों को लाभ दिया जा चुका है.
गांव-गांव में दूध समितियां, किसानों को सीधा फायदा
प्रदेश में दूध के काम को बढ़ावा देने के लिए अब तक 6,121 गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां बनाई गई हैं. इन समितियों की मदद से 2,44,840 दूध उत्पादकों को अपने गांव में ही सही दाम पर दूध बेचने की सुविधा मिल रही है. सरकार की योजना है कि साल 2026-27 में 8,000 और पशुपालकों को इन योजनाओं से जोड़ा जाए. साथ ही 1,750 नए गांवों में भी नई दुग्ध समितियां बनाई जाएंगी, जिससे करीब 70,000 और लोगों को फायदा होगा. इन योजनाओं को चलाने के लिए सरकार ने 276.55 करोड़ रुपये की राशि तय की है.
यूपी बना देश में दूध उत्पादन में नंबर वन
उत्तर प्रदेश इस समय पूरे देश में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला राज्य है. यह स्थान सरकार की योजनाओं, बढ़ते निवेश और किसानों की मेहनत की वजह से मिला है. गांव-गांव में दुग्ध समितियां बन रही हैं, नई योजनाएं शुरू हो रही हैं और पशुपालकों को आर्थिक मदद दी जा रही है. सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले सालों में भी यूपी इसी तरह नंबर वन बना रहे और किसानों की आमदनी लगातार बढ़ती रहे.