Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य में अब गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की ‘टैगिंग’ पर रोक लगा दी गई है. इस फैसले का स्वागत घुलनशील उर्वरक बनाने वाली कंपनियों के संगठन ने भी किया है. उनका कहना है कि इससे किसानों को राहत मिलेगी और उर्वरक वितरण व्यवस्था ज्यादा साफ और पारदर्शी बनेगी.
काफी समय से किसान इस बात की शिकायत कर रहे थे कि उन्हें जरूरत से ज्यादा या अनचाहे उर्वरक खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है. इससे खेती की लागत बढ़ जाती थी. सरकार का यह नया आदेश उसी समस्या को खत्म करने की कोशिश है.
आखिर ‘टैगिंग’ होती क्या है?
आसान शब्दों में समझें तो ‘टैगिंग’ एक ऐसी व्यवस्था थी, जिसमें दुकानदार किसानों को लोकप्रिय और सब्सिडी वाले उर्वरक जैसे यूरिया या डीएपी तभी देते थे, जब वे साथ में गैर-सब्सिडी उत्पाद भी खरीदें. इन गैर-सब्सिडी उत्पादों में माइक्रो न्यूट्रिएंट्स, बायो-स्टिमुलेंट या अन्य विशेष उर्वरक शामिल होते थे.
कई बार किसान को इन अतिरिक्त उत्पादों की जरूरत नहीं होती थी, फिर भी उसे मजबूरी में खरीदना पड़ता था. इससे उसकी जेब पर सीधा असर पड़ता था. छोटे किसानों के लिए यह अतिरिक्त खर्च भारी साबित होता था.
उद्योग संगठन ने जताया समर्थन
बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, घुलनशील उर्वरक उद्योग से जुड़े राष्ट्रीय संगठन ने इस फैसले की सराहना की है. संगठन ने कहा है कि यह कदम लंबे समय से जरूरी था. उनका मानना है कि इससे बाजार में बराबरी का माहौल बनेगा और छोटे व मध्यम उद्योगों को भी सही अवसर मिलेगा.
संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि अब किसान अपनी जरूरत और बजट के अनुसार उर्वरक चुन सकेंगे. इससे उन्हें फैसला लेने की आजादी मिलेगी और खेती में संतुलन भी बना रहेगा.
किसानों को क्या मिलेगा फायदा
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ किसानों को होगा. अब वे अपनी फसल और मिट्टी की जरूरत के हिसाब से उर्वरक खरीद सकेंगे. उन्हें किसी दबाव में अतिरिक्त उत्पाद नहीं लेने पड़ेंगे. इससे खेती की लागत कम हो सकती है और मुनाफा बढ़ने की संभावना बनेगी.
संतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की सेहत भी बेहतर रहेगी. कई बार जरूरत से ज्यादा या गलत उर्वरक डालने से मिट्टी की उर्वरता पर असर पड़ता है. अब किसान सोच-समझकर उर्वरक चुन पाएंगे.
छोटे उद्योगों को भी राहत
इस फैसले से छोटे और मध्यम स्तर के उर्वरक निर्माता भी खुश हैं. पहले बाजार में बड़े डीलरों का दबदबा रहता था और टैगिंग के कारण प्रतिस्पर्धा बराबरी की नहीं हो पाती थी. अब छोटे उद्योग अपने उत्पाद की गुणवत्ता और तकनीक के दम पर बाजार में जगह बना सकेंगे.
इससे नवाचार आधारित खेती को भी बढ़ावा मिलेगा. नई तकनीक और आधुनिक पोषक तत्व किसानों तक सही तरीके से पहुंच सकेंगे.
पारदर्शी और किसान-केंद्रित व्यवस्था की ओर
सरकार का यह कदम उर्वरक वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अगर इस नियम का सही ढंग से पालन हुआ तो किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा.
उद्योग संगठनों ने भरोसा दिलाया है कि वे सरकार के साथ मिलकर संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक खेती को बढ़ावा देंगे. उनका कहना है कि यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि किसान को सशक्त बनाने की पहल है.
क्या अन्य राज्य भी अपनाएंगे यह मॉडल?
कई लोग मानते हैं कि उत्तर प्रदेश का यह कदम दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है. अगर पूरे देश में ऐसी व्यवस्था लागू होती है तो उर्वरक बाजार अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकता है.