गांव में डेयरी बिजनेस का सुनहरा मौका.. MP सरकार दे रही 33 फीसदी सब्सिडी, ऐसे बदलें किस्मत
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों और पशुपालकों के लिए डेयरी बिजनेस शुरू करने का शानदार मौका दिया है. कामधेनु योजना के तहत सरकार सब्सिडी और बैंक लोन की सुविधा दे रही है. इसका मकसद गांवों में रोजगार बढ़ाना, दूध उत्पादन बढ़ाना और लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है.
Kamdhenu Scheme : गांव में रहकर अच्छी कमाई करना आज हर किसान और पशुपालक का सपना है. अगर आप भी डेयरी बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पैसों की कमी आड़े आ रही है, तो अब चिंता छोड़ दीजिए. मध्य प्रदेश सरकार आपके सपने को सच करने के लिए एक शानदार योजना लेकर आई है. इस योजना का नाम है डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना, जिसके तहत डेयरी खोलने पर सरकार 33 फीसदी तक सब्सिडी दे रही है. खास बात यह है कि इस योजना से युवाओं, किसानों और पशुपालकों को स्थायी रोजगार मिलेगा और गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
क्या है कामधेनु योजना और किसे मिलेगा फायदा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना का ही एक नया हिस्सा है. इस योजना के तहत सरकार पशुपालकों को 25 दुधारू पशुओं की डेयरी यूनिट लगाने का मौका दे रही है. अगर कोई लाभार्थी चाहे, तो वह एक से ज्यादा यूनिट भी लगा सकता है. अधिकतम 8 यूनिट यानी 200 दुधारू पशुओं तक की डेयरी परियोजना इस योजना में शामिल है. इसका सीधा फायदा यह होगा कि छोटे स्तर से शुरू करके बड़े डेयरी कारोबारी बनने का रास्ता खुल जाएगा.
कितनी लागत आएगी और कितनी मिलेगी सब्सिडी
अब सबसे जरूरी सवाल-पैसा कितना लगेगा? तो बता दें कि 25 दुधारू पशुओं की एक यूनिट लगाने में करीब 36 से 42 लाख रुपये की लागत आएगी. इसमें पशुओं की खरीद, शेड बनाना, चारे की व्यवस्था और अन्य जरूरी खर्च शामिल हैं.
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- योजना की सबसे बड़ी खासियत है इसकी सब्सिडी.
- अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को कुल लागत का 33 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा.
- अन्य वर्गों के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी तय की गई है.
- बाकी राशि बैंक लोन के जरिए मिलेगी, जिससे जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा.
जमीन, ट्रेनिंग और चयन की आसान प्रक्रिया
इस योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी के पास कम से कम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है. जमीन खुद के नाम या परिवार के संयुक्त खाते में हो सकती है, लेकिन सभी सदस्यों की सहमति जरूरी होगी. अगर ज्यादा यूनिट लगानी है, तो उसी हिसाब से जमीन भी होनी चाहिए. सरकार चाहती है कि डेयरी बिजनेस सही और वैज्ञानिक तरीके से चले. इसलिए लाभार्थियों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे वे पशु स्वास्थ्य, दूध उत्पादन और डेयरी प्रबंधन को अच्छे से समझ सकें. चयन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी है. आमतौर पर चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा. जो पशुपालक पहले से दुग्ध संघ या सहकारी संस्था को दूध सप्लाई कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी.
आवेदन कैसे करें और कौन से दस्तावेज चाहिए
इस योजना में आवेदन करना बेहद आसान है. इच्छुक लोग पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. चाहें तो अपने जिले के पशु चिकित्सा सेवाएं कार्यालय से भी पूरी जानकारी ले सकते हैं.
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज हैं:- आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, कृषि भूमि के कागजात, बैंक खाता विवरण, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र.