भीषण गर्मी में भी नहीं रुकेगा दूध उत्पादन, ये देसी गायें कम चारे में भी देती हैं भरपूर दूध
गर्मी बढ़ने के साथ पशुपालकों की चिंता भी बढ़ जाती है, लेकिन कुछ देसी गायों की नस्लें कठिन मौसम में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं. ये नस्लें कम संसाधनों में भी बेहतर दूध उत्पादन देने के लिए जानी जाती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम में इनका महत्व लगातार बढ़ रहा है.
Desi Cow Breeds: देश के कई हिस्सों में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है. ऐसे मौसम में जहां कई पशुओं के दूध उत्पादन पर असर पड़ता है, वहीं कुछ देसी गायों की नस्लें अपनी विशेष खूबियों के कारण बेहतर प्रदर्शन करती हैं. पशुपालन विशेषज्ञों का मानना है कि गर्म जलवायु, सीमित चारे और पानी की कमी जैसी परिस्थितियों में भी ये नस्लें अच्छी मात्रा में दूध देने में सक्षम होती हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, देसी गायों में गर्मी सहने की क्षमता अधिक होती है, जिससे पशुपालकों को कठिन मौसम में भी बेहतर उत्पादन मिलता है.
गर्मी में भी दूध उत्पादन बनाए रखने की क्षमता
कुछ देसी गायों की नस्लें जैसे थारपारकर, साहीवाल, गिर, लाल सिंधी, राठी और कांकरेज गाय 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी सामान्य रूप से रह सकती हैं. इन नस्लों का शरीर गर्म वातावरण के अनुरूप विकसित हुआ है, जिसके कारण अत्यधिक गर्मी का असर इनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है. यही वजह है कि सूखे और गर्म क्षेत्रों में पशुपालक इन नस्लों को प्राथमिकता देते हैं.
कम चारा और पानी में भी बेहतर प्रदर्शन
विशेषज्ञों के अनुसार, कई देसी नस्लें सीमित संसाधनों में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं. कम हरे चारे, सूखे चारे और सीमित पानी की उपलब्धता के बावजूद ये गायें नियमित दूध उत्पादन जारी रख सकती हैं. इससे पशुपालकों की लागत कम होती है और लाभ बढ़ने की संभावना रहती है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह विशेषता इन्हें अधिक उपयोगी बनाती है.
रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाती है खास
देसी गायों की सबसे बड़ी खूबियों में उनकी मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता शामिल है. ये नस्लें मौसम में अचानक बदलाव और कई सामान्य बीमारियों का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर लेती हैं. इससे पशुओं के उपचार पर होने वाला खर्च कम होता है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से राहत मिलती है. विशेषज्ञों का कहना है कि देसी नस्लों का स्वास्थ्य प्रबंधन भी अपेक्षाकृत आसान होता है.
डेयरी व्यवसाय के लिए बेहतर विकल्प
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, गर्म और शुष्क क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए देसी गायें एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती हैं. ये नस्लें प्रतिदिन 10 से 20 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती हैं, साथ ही कठिन परिस्थितियों में भी उत्पादक बनी रहती हैं. बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के दौर में देसी नस्लों का महत्व और बढ़ गया है. यही कारण है कि अब अधिक से अधिक पशुपालक इन नस्लों को अपनाकर डेयरी व्यवसाय को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.