Livestock Care: देश में बढ़ती गर्मी का असर अब पशुओं पर भी साफ नजर आने लगा है. खासकर दुधारू पशु जैसे गाय और भैंस इस मौसम में ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. गर्मी के कारण दो बड़ी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं कि रूमेन इंफेक्शन (पाचन तंत्र की गड़बड़ी) और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी). पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार अगर इन बीमारियों को समय रहते नहीं संभाला गया, तो दूध उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है और पशु गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं.
रूमेन इंफेक्शन
गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा देखने वाली समस्या रूमेन इंफेक्शन है, जो सीधे पशु के पाचन तंत्र को प्रभावित करती है. कुंवर घनश्याम बताते हैं कि इस बीमारी में पशु के पेट की गतिविधि धीमी हो जाती है, जिससे खाना ठीक से पच नहीं पाता. इसका असर सीधे दूध उत्पादन पर पड़ता है और अचानक दूध कम होने लगता है. कई बार पशुपालक इसे छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह आगे चलकर बड़ी बीमारी बन सकती है. ज्यादा दूध देने वाली गाय-भैंस इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होती हैं, क्योंकि उनके शरीर पर पहले से ही ज्यादा दबाव होता है.
डिहाइड्रेशन
गर्मी में दूसरी बड़ी समस्या डिहाइड्रेशन है, यानी शरीर में पानी की कमी. जब पशु पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो उनका शरीर कमजोर होने लगता है. कुंवर घनश्याम के अनुसार, पानी की कमी से पशु सुस्त हो जाते हैं, उनका संतुलन बिगड़ जाता है और दूध उत्पादन भी घटने लगता है. तेज गर्मी में पशु ज्यादा पसीना और सांस के जरिए पानी खो देते हैं, इसलिए उन्हें सामान्य दिनों से ज्यादा पानी की जरूरत होती है. अगर समय पर पानी नहीं मिला, तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है.
इन लक्षणों को पहचानें, समय पर करें इलाज
पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे इन बीमारियों के लक्षण समय रहते पहचान लें. जैसे पशु का चारा कम खाना, दूध अचानक कम हो जाना, पेट का ठीक से काम न करना और गोबर कम या बंद हो जाना-ये सभी रूमेन इंफेक्शन के संकेत हैं. वहीं, डिहाइड्रेशन में पशु सुस्त हो जाते हैं, कमजोर दिखते हैं और बार-बार पानी पीने की कोशिश करते हैं. कुंवर घनश्याम का कहना है कि अगर ऐसे कोई भी लक्षण दिखें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय पर इलाज हो सके.
बचाव के आसान तरीके, रखें इन बातों का ध्यान
गर्मी में पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाना बहुत जरूरी है. सबसे पहले, पशुओं को हमेशा साफ और ठंडा पानी पर्याप्त मात्रा में देना चाहिए. सूखा भूसा सीधे नहीं खिलाना चाहिए, बल्कि उसे पहले पानी में भिगोकर देना चाहिए और हरे चारे के साथ मिलाकर खिलाना चाहिए. पशुओं को हमेशा छांव में रखें और तेज धूप से बचाएं, ताकि उनका शरीर ज्यादा गर्म न हो. इसके अलावा, समय-समय पर पशु चिकित्सक से जांच करवाना भी जरूरी है, ताकि बीमारी का पता पहले ही चल सके. कुंवर घनश्याम के अनुसार, अगर पशुपालक इन बातों का ध्यान रखें, तो गर्मी के मौसम में भी पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन में कमी नहीं आएगी.