मछली पालन से कमाई बढ़ानी है तो मार्च में करें तालाब की सही तैयारी, विभाग ने बताए जरूरी उपाय

मार्च का महीना मछली पालन शुरू करने के लिए अहम माना जाता है. बिहार सरकार के मत्स्य निदेशालय ने मछली पालकों को तालाब की सफाई, पानी का पीएच संतुलन, चूना, गोबर और उर्वरक के सही इस्तेमाल की सलाह दी है. सही तैयारी करने से मछलियों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन के साथ किसानों की आय भी बढ़ती है.

नोएडा | Published: 13 Mar, 2026 | 03:21 PM

Fisheries Department: मार्च का महीना मछली पालन शुरू करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय अगर तालाब की सही तरीके से तैयारी कर ली जाए तो पूरे साल मछली का अच्छा उत्पादन मिल सकता है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य निदेशालय ने मछली पालकों को सलाह दी है कि मार्च में तालाब की सफाई, पानी की गुणवत्ता और खाद-उर्वरक के सही इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दें. सही तैयारी से मछलियों की बढ़वार बेहतर होती है और किसानों की आमदनी भी बढ़ती है.

तालाब की सफाई और पानी की निकासी जरूरी

मत्स्य निदेशालय के अनुसार, मछली पालन  शुरू करने से पहले तालाब की अच्छी तरह सफाई करना बेहद जरूरी है. सबसे पहले तालाब का पुराना पानी पूरी तरह निकाल देना चाहिए. इसके बाद तालाब को कुछ दिनों तक धूप में सूखने देना चाहिए. इससे तालाब में मौजूद हानिकारक कीट, परजीवी और रोग पैदा करने वाले जीव खत्म हो जाते हैं. तालाब सूखने के बाद उसकी मिट्टी को समतल कर लेना चाहिए और यदि कहीं ज्यादा गाद जमा हो गई हो तो उसे हटा देना चाहिए. इससे तालाब का वातावरण साफ और संतुलित रहता है, जो मछलियों के लिए बहुत जरूरी है.

पीएच स्तर के अनुसार चूना डालना जरूरी

मछली पालन में पानी की गुणवत्ता  सबसे महत्वपूर्ण होती है. इसलिए तालाब में पानी भरने के बाद उसका पीएच स्तर जांचना जरूरी होता है. मत्स्य विभाग के अनुसार, पीएच स्तर के आधार पर ही तालाब में चूना डालना चाहिए. सामान्य तौर पर यदि तालाब की मिट्टी अम्लीय (खट्टी) हो तो चूना डालना जरूरी होता है. चूना डालने से पानी का पीएच संतुलित होता है और मछलियों के लिए अनुकूल वातावरण बनता है. चूना तालाब में मछली के बीज डालने से लगभग 15 दिन पहले डाल देना चाहिए ताकि पानी पूरी तरह संतुलित हो सके.

मछली पालन से पहले तालाब तैयार करने की जरूरी जानकारी.

गोबर और रासायनिक उर्वरक का सही उपयोग

तालाब में प्राकृतिक भोजन तैयार करने के लिए गोबर और रासायनिक उर्वरक  का इस्तेमाल भी जरूरी होता है. मत्स्य निदेशालय के अनुसार, मछली के बीज डालने से लगभग 15 दिन पहले तालाब में गोबर का छिड़काव करना चाहिए. गोबर डालने से पानी में सूक्ष्म जीव और प्लवक (प्लैंकटन) पैदा होते हैं, जो मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन का काम करते हैं. इसके साथ ही जरूरत के अनुसार रासायनिक उर्वरक का भी छिड़काव किया जाता है. इससे तालाब की उत्पादकता बढ़ती है और मछलियों को पर्याप्त भोजन मिलता है.

सही समय पर करें मत्स्य बीज का संचयन

तालाब की पूरी तैयारी होने के बाद ही उसमें मछली के बीज यानी फिंगरलिंग्स डाले जाने चाहिए. विभाग की सलाह है कि चूना, गोबर और उर्वरक डालने के लगभग 15 दिन बाद ही मत्स्य बीज  का संचयन करना चाहिए. अगर बिना तैयारी के सीधे बीज डाल दिए जाएं तो मछलियों की बढ़वार सही तरीके से नहीं हो पाती. इसलिए तालाब में पर्याप्त प्राकृतिक भोजन तैयार होने के बाद ही बीज डालना बेहतर होता है. इससे मछलियों की जीवित रहने की दर भी बढ़ती है और उत्पादन अच्छा मिलता है.

सही देखभाल से बढ़ेगी मछली पालन से कमाई

मत्स्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान तालाब की तैयारी, पानी की गुणवत्ता और भोजन पर सही तरीके से ध्यान दें तो मछली पालन काफी लाभदायक व्यवसाय बन सकता है. बिहार में बड़ी संख्या में किसान मछली पालन से अच्छी आय कमा रहे हैं. मार्च महीने में की गई सही तैयारी पूरे साल उत्पादन पर असर डालती है. इसलिए मत्स्य विभाग ने मछली पालकों  से अपील की है कि वे वैज्ञानिक तरीके से तालाब तैयार करें और विभाग की सलाह का पालन करें. इससे मछली उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी अच्छा इजाफा होगा.

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