Fish Farming: गांवों में मार्च का महीना मछली पालकों के लिए नई शुरुआत का समय माना जाता है. जैसे किसान नई फसल की तैयारी करते हैं, वैसे ही मछली पालक भी तालाब तैयार कर नई मछलियों का संचयन करते हैं. अगर इस समय सही तरीके से तालाब की सफाई, पानी की जांच और मछलियों की देखभाल की जाए तो साल भर अच्छा उत्पादन मिल सकता है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार के अनुसार मार्च में कुछ जरूरी काम करने से मछलियों की सेहत अच्छी रहती है और उत्पादन भी बढ़ता है.
पुराने स्टॉक निकालकर तालाब करें तैयार
मार्च के पहले सप्ताह में तालाब से पुरानी मछलियों को निकाल लेना चाहिए ताकि नई मछलियों के लिए जगह बन सके. इसके बाद तालाब की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए. अगर संभव हो तो तालाब का पानी निकालकर उसे सुखाना चाहिए. तालाब सूखने के बाद उसमें फिर से पानी भरकर मिट्टी और पानी की जांच करवाना जरूरी है. इससे पता चलता है कि तालाब का पानी मछलियों के लिए सही है या नहीं. तालाब तैयार करते समय चूना, गोबर और रासायनिक खाद डालना चाहिए, लेकिन यह काम मछली बीज डालने से कम से कम 15 दिन पहले करना जरूरी है. अगर तालाब सुखाना संभव नहीं हो तो उसमें मौजूद खरपतवार निकाल देना चाहिए. साथ ही बेकार और अवांछित मछलियों को खत्म करने के लिए महुआ की खल्ली का इस्तेमाल करना चाहिए.
मछलियों की जांच और सही आहार जरूरी
अगर तालाब में पहले से छोटी मछलियां मौजूद हैं तो जाल चलाकर उनकी जांच करनी चाहिए. इससे मछलियों की संख्या, आकार और स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है. जांच के बाद मछलियों के कुल वजन के हिसाब से उन्हें नियमित खाना देना शुरू करना चाहिए. सही समय पर और सही मात्रा में खाना देने से मछलियां तेजी से बढ़ती हैं और बीमारी का खतरा कम रहता है.
पानी की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी
तालाब का पानी साफ और संतुलित होना बहुत जरूरी है. इसके लिए हर 15 दिन पर तालाब में चूने का छिड़काव करना चाहिए. प्रति एकड़ 10 से 15 किलो चूना पानी में घोलकर डालना सही माना जाता है. समय-समय पर पानी और मिट्टी की जांच करवाने से तालाब की स्थिति का पता चलता रहता है. अगर पानी का पीएच सही रहेगा तो मछलियां स्वस्थ रहेंगी और उत्पादन अच्छा होगा. बरसात या बदली वाले दिनों में पानी में ऑक्सीजन कम हो सकती है. ऐसी स्थिति में पानी को हिलाने या एयरेशन की व्यवस्था करनी चाहिए. मछलियों को बीमारी से बचाने के लिए पोटाशियम परमेग्नेट का प्रयोग भी किया जा सकता है.
सही समय पर करें मत्स्य बीज संचयन
मछली बीज डालने का सही समय 15 मार्च से 30 मार्च के बीच माना गया है. बीज डालने से पहले तालाब में खाद डालकर कम से कम 15 दिन का अंतर रखना चाहिए. बीज डालने का काम सुबह 9 बजे से 12 बजे के बीच करना बेहतर माना जाता है. बहुत गर्म समय या बरसात वाले दिन बीज नहीं डालना चाहिए. सामान्य मछलियों के लिए लगभग 4000 फिंगरलिंग प्रति एकड़ डालना सही रहता है. इससे मछलियों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है.
खास प्रजातियों के लिए मार्च आदर्श महीना
मार्च का महीना कुछ खास मछलियों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. पंगेशियस मछली की 15 से 20 ग्राम वजन वाली अंगुलिकाएं इस समय डाली जा सकती हैं. इनकी संख्या 10 हजार से 15 हजार प्रति एकड़ रखी जा सकती है. इसी तरह मार्च के दूसरे और तीसरे सप्ताह से ग्रास कार्प मछली की प्रजनन तैयारी भी शुरू की जा सकती है. इसके लिए प्रजनक मछलियों को अलग तालाब में रखकर संतुलित आहार देना चाहिए. अगर मछली पालक मार्च में इन जरूरी बातों का ध्यान रखें तो साल भर अच्छी पैदावार मिल सकती है. सही समय पर तालाब की तैयारी, पानी की जांच और मछलियों की देखभाल से मुनाफा बढ़ाना आसान हो जाता है. यही वजह है कि विशेषज्ञ मार्च को मछली पालन की नई शुरुआत का सबसे अच्छा समय मानते हैं.