सीफूड एक्सपोर्ट में भारत का जलवा…अमेरिका से जापान तक बढ़ी मांग, झींगा बना सबसे बड़ा कमाई का जरिया

भारत का सीफूड एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ रहा है और पिछले 11 साल में यह दोगुना हो गया है. मत्स्य पालन विभाग के अनुसार झींगा, फ्रोजन फिश और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स की मांग दुनिया के 130 बाजारों में बढ़ी है. इससे मछुआरों, किसानों और प्रोसेसिंग कारोबार से जुड़े लोगों की कमाई को बड़ा सहारा मिला है.

नोएडा | Published: 4 Apr, 2026 | 12:12 PM

Seafood Export: भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब सिर्फ तालाब, नदी और समुद्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और विदेशों में कमाई का मजबूत आधार बन चुका है. मत्स्य पालन विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में इस सेक्टर ने तेज रफ्तार से तरक्की की है. केंद्र सरकार ने 2015 से अब तक इस क्षेत्र में 39,272 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निवेश किया है, जिसका असर उत्पादन से लेकर निर्यात तक साफ दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक देश बन चुका है और वैश्विक मछली उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 8 फीसदी है.

मछली उत्पादन में तेज बढ़ोतरी

मत्स्य विभाग के मुताबिक देश में मछली उत्पादन  लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2019-20 में 141.64 लाख टन उत्पादन था, जो बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुंच गया. यानी हर साल करीब 7 फीसदी की औसत बढ़त दर्ज की गई. यह बढ़ोतरी बताती है कि पारंपरिक तरीके से होने वाला मछली पालन अब एक बड़े व्यवसाय में बदल चुका है. इस क्षेत्र से सीधे तौर पर करीब 3 करोड़ मछुआरे और मछली पालक जुड़े हैं, जबकि पूरी सप्लाई चेन में इससे लगभग दोगुने लोगों को रोजगार मिल रहा है. गांवों में छोटे किसानों और तालाब आधारित मछली पालन करने वालों के लिए यह आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बन गया है.

11 साल में दोगुना हुआ सीफूड एक्सपोर्ट

भारत के सीफूड एक्सपोर्ट  ने भी पिछले एक दशक में शानदार प्रदर्शन किया है. विभाग के अनुसार पिछले 11 वर्षों में औसतन 7 फीसदी सालाना वृद्धि दर्ज हुई है. समुद्री उत्पादों का निर्यात 2013-14 के 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसमें सबसे बड़ा योगदान झींगा (Shrimp) एक्सपोर्ट का रहा, जिसकी अकेली कीमत 43,334 करोड़ रुपये रही. आसान भाषा में कहें तो भारत का झींगा अब दुनिया के बाजार में सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है, जिससे देश की विदेशी कमाई तेजी से बढ़ी है.

130 देशों तक पहुंचा भारत का सीफूड

मत्स्य पालन विभाग  के अनुसार भारत अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं है. देश से 350 से ज्यादा तरह के सीफूड उत्पाद करीब 130 वैश्विक बाजारों में भेजे जा रहे हैं. इनमें अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार है, जिसकी हिस्सेदारी 36.42 फीसदी है. इसके बाद चीन, यूरोपीय यूनियन, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मिडिल ईस्ट जैसे बड़े बाजार शामिल हैं. फ्रोजन श्रिम्प भारत का सबसे बड़ा और लोकप्रिय उत्पाद बना हुआ है. इसके अलावा फ्रोजन फिश, स्क्विड, सूखी मछली, कटलफिश, सुरिमी प्रोडक्ट्स और लाइव-चिल्ड सीफूड की मांग भी तेजी से बढ़ी है.

वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स से बढ़ी ग्लोबल प्रतिस्पर्धा

इस बार सबसे खास बात यह रही कि भारत अब सिर्फ कच्चा सीफूड नहीं बेच रहा, बल्कि प्रोसेस्ड और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स पर भी तेजी से काम कर रहा है. एक्सपोर्ट बास्केट में इन उत्पादों की हिस्सेदारी 2.5 फीसदी से बढ़कर 11 फीसदी हो गई है. इससे करीब 742 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ है. इसका सीधा मतलब है कि भारत अब ग्लोबल मार्केट  में सिर्फ मात्रा नहीं, बल्कि क्वालिटी और प्रोसेसिंग के दम पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. मत्स्य विभाग का मानना है कि यह बदलाव छोटे मछली पालकों, झींगा किसानों और प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए आने वाले समय में और बड़े अवसर खोलेगा. आसान शब्दों में कहें तो भारत का मछली कारोबार अब “गांव से ग्लोबल बाजार” तक पहुंच चुका है, और आने वाले सालों में यह सेक्टर किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा इंजन बन सकता है.

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