पशुपालक रहें सावधान! बच्चा देने के बाद बढ़ता है कीटोसिस का खतरा, जानें बचाव के तरीके

दुधारू पशुओं की सेहत के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है. सही खान-पान न मिलने पर कीटोसिस जैसी गंभीर समस्या हो सकती है, जिससे दूध उत्पादन और पशु की कार्यक्षमता प्रभावित होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते लक्षण पहचानकर उचित देखभाल करने से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है.

नोएडा | Published: 25 Jun, 2026 | 05:02 PM

Ketosis Disease: मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर केवल इंसानों पर ही नहीं बल्कि दुधारू पशुओं की सेहत पर भी पड़ रहा है. पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार, खराब या असंतुलित आहार के कारण पशुओं में कीटोसिस (Ketosis) नामक बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, ये समस्या विशेष रूप से अधिक दूध देने वाली गायों और भैंसों में देखने को मिलती है. समय पर पहचान और उचित देखभाल से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है.

क्या है कीटोसिस बीमारी और क्यों होती है?

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, कीटोसिस एक चयापचय (मेटाबॉलिक) बीमारी है, जो आमतौर पर पशु के डिलीवरी  के बाद शुरुआती दिनों में होती है. इस दौरान दूध उत्पादन के लिए शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है. जब पशु को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती तो शरीर वसा को तोड़कर ऊर्जा बनाना शुरू करता है, जिससे कीटोन तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है. यही स्थिति कीटोसिस बीमारी का कारण बनती है. इससे पशु की सेहत के साथ-साथ दूध उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है.

किन पशुओं में अधिक रहता है खतरा?

ये बीमारी मुख्य रूप से अधिक दूध देने वाली गायों और भैंसों में देखने को मिलती है. ब्याने के बाद पहले दो से तीन सप्ताह का समय सबसे संवेदनशील माना जाता है. यदि इस दौरान पशु को संतुलित और ऊर्जा युक्त आहार नहीं मिलता तो बीमारी का जोखिम काफी बढ़ जाता है. पशुपालकों को इस अवधि में पशुओं के खान-पान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है.

बीमारी के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

कीटोसिस होने पर पशुओं में कई तरह के लक्षण दिखाई  दे सकते हैं. दूध उत्पादन में अचानक कमी आना, भूख कम लगना, वजन घटना, कमजोरी और सुस्ती इसके सामान्य संकेत हैं. कुछ मामलों में पशु के मुंह से एसीटोन जैसी गंध भी आ सकती है. इसके अलावा पाचन संबंधी समस्याएं, कम गोबर करना और व्यवहार में बदलाव भी देखने को मिलते हैं. गंभीर स्थिति में पशु बार-बार शरीर को चाट सकता है, दांत किटकिटा सकता है, चलने में लड़खड़ा सकता है या एक ही दिशा में घूमने जैसी असामान्य गतिविधियां भी कर सकता है. कई बार पशु खड़े-खड़े गिर भी सकता है, जिससे उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है.

बचाव और उपचार के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों के अनुसार, कीटोसिस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका संतुलित और ऊर्जा युक्त आहार देना है. पशुओं के भोजन में हरा चारा, सूखा चारा, दाना और आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में शामिल होने चाहिए. मिनरल मिक्सचर का नियमित उपयोग भी लाभदायक माना जाता है. आहार में अचानक बदलाव करने से बचना चाहिए और पशु के वजन तथा दूध उत्पादन की नियमित निगरानी करनी चाहिए. यदि बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है. समय पर उपचार और उचित आहार प्रबंधन से पशु जल्दी स्वस्थ हो सकता है तथा दूध उत्पादन को भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है.

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