Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने पशुपालन सेक्टर को कृषि में शामिल करने का निर्णय लिया है. राज्य सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही सरकार के इस फैसले से 3.7 करोड़ से अधिक पशुपालकों को कृषि के समान ही रियायती बिजली, सस्ता कर्ज और सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलेगा. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और यह क्षेत्र एक स्थायी आजीविका का साधन बन सकेगा.
किसानों को मिलेगा सब्सिडी का लाभ
पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे के अनुसार, अब पशुपालक किसान कृषि दर पर लोन ले सकेंगे और पशुपालन गतिविधियों के लिए 50 फीसदी सब्सिडी का लाभ उठा सकेंगे. मुंडे ने कहा है कि पशुपालन को एक व्यापक उद्योग में बदलने के प्रयास जारी है और इस क्षेत्र को ग्रामीण रोजगार का स्थायी स्रोत बनाने में समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए 4 फीसदी तक कम ब्याज दर पर ऋण और 50 फीसदी तक सब्सिडी का लाभ मिलेगा.
इन जिलों में पशुपालन कॉलेज खोलने की मिली मंजूरी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बारामती और पारली वैजनाथ में पशुपालन कॉलेज खोलने के प्रस्ताव भी मंजूर किए गए हैं. मुंडे ने कहा कि महापशुधन एक्सपो 2026 में पूरे भारत से गाय, बैल, घोड़े, बकरियों और कई पक्षियों की प्रजातियां प्रदर्शित की गई हैं.
मछली पालकों को भी दिया था गिफ्ट
बता दें कि सरकार ने पशुपालन के साथ-साथ मुर्गीपालन को कृषि के समान दर्जा दिया है, जिससे 3.7 करोड़ से अधिक किसानों को फायदा होगा. ऐसे भी राज्य सरकार मावल जैसे क्षेत्रों में महिला डेयरी सहकारी समितियों (जैसे MDPSPC) को बढ़ावा दे रही है. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में 140 से अधिक पशु चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से पशु स्वास्थ्य और कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. वहीं, राज्य सरकार ने पिछले साल मछली पालन को आधिकारिक तौर पर कृषि का दर्जा दिया था. इससे 4.83 लाख से अधिक मछुआरों और संबंधित हितधारकों को लाभ होगा. अब मछली पालकों को बिजली की रियायती दरों, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कम ब्याज पर बैंक ऋण, और कृषि के समान बीमा व सब्सिडी का लाभ मिल रहा है.