किसानों के विकास के लिए बड़ी घोषणा, कृषि योजनाओं और विश्वविद्यालयों को 100 करोड़ से ज्यादा की धनराशि मंजूर

किसानों की आय बढ़ाने और खेती को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने कई बड़ी योजनाओं के लिए धनराशि मंजूर की है. इस फैसले के तहत कृषि योजनाओं, सिंचाई सुविधाओं और कृषि विश्वविद्यालयों को आर्थिक सहायता दी जाएगी. इससे किसानों को नई तकनीक, बेहतर संसाधन और खेती में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे.

नोएडा | Updated On: 13 Mar, 2026 | 07:38 PM

Agriculture Scheme: खेती को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और सुविधाएं दे रही है. इसी दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई योजनाओं और संस्थानों को बड़ी आर्थिक मंजूरी दी है. इस फैसले के तहत कुल 10059.06 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है. इस धनराशि का उपयोग किसानों को नई तकनीक से जोड़ने, खेती को आधुनिक बनाने और कृषि शिक्षा व अनुसंधान को मजबूत करने के लिए किया जाएगा. माना जा रहा है कि इससे किसानों और कृषि क्षेत्र दोनों को बड़ा फायदा मिलेगा.

किसानों के लिए योजनाओं में बड़ी राशि की मंजूरी

किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत  करने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 10059.06 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है. यह राशि अलग-अलग योजनाओं और कृषि से जुड़े संस्थानों के विकास पर खर्च की जाएगी. इस फैसले का उद्देश्य किसानों को नई तकनीक से जोड़ना, खेती को ज्यादा लाभकारी बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर योजनाओं का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो इससे किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और खेती का स्तर भी बेहतर होगा.

पीएम कुसुम योजना को सबसे ज्यादा फंड

किसानों को सस्ती और साफ ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा  सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम योजना) के तहत सबसे ज्यादा 7400 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है. इस योजना के जरिए किसानों को सोलर ऊर्जा से चलने वाले पंप और अन्य उपकरण लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. इससे किसानों को बिजली की समस्या से राहत मिलती है और सिंचाई का काम भी आसान हो जाता है. साथ ही डीजल की लागत भी कम हो जाती है, जिससे खेती का खर्च घटता है और किसानों को ज्यादा फायदा मिलता है.

खाद्य तेल और टिकाऊ खेती को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल योजना के लिए 896.73 लाख रुपये की राशि मंजूर की है. इस योजना का उद्देश्य देश में तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ाना है, ताकि खाने के तेल के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो सके. इसके अलावा नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के तहत रेनफेड एरिया डेवलपमेंट योजना के लिए 762.33 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है. इस योजना के जरिए उन क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा दिया जाएगा जहां बारिश के पानी पर खेती निर्भर रहती है. इससे किसानों को बेहतर तकनीक और संसाधन मिलेंगे.

कृषि विश्वविद्यालयों को भी मिली आर्थिक सहायता

खेती में नई तकनीक और शोध को बढ़ावा देने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों को भी आर्थिक सहायता दी गई है. एक विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय, मत्स्य विद्यालय और पशु चिकित्सा व पशुपालन महाविद्यालय के उपकरणों के लिए कुल 175 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है. इन संस्थानों में आधुनिक उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध होने से छात्रों को बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण मिलेगा. इससे कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन  के क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी, जिसका फायदा सीधे किसानों तक पहुंचेगा.

कृषि संस्थानों के विकास पर भी जोर

कृषि शिक्षा और शोध को मजबूत बनाने के लिए अन्य कृषि विश्वविद्यालयों को भी आर्थिक सहायता दी गई है. एक कृषि विश्वविद्यालय को 100 लाख रुपये और दूसरे विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि अभियांत्रिकी से जुड़े उपकरणों के लिए 225 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है. इसके अलावा एक प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्थित ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण और सुदृढ़ीकरण के लिए 500 लाख रुपये की राशि दी गई है. इससे न सिर्फ विश्वविद्यालय का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि वहां पढ़ने वाले छात्रों और शोधकर्ताओं को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि योजनाओं और संस्थानों को मिल रही यह आर्थिक सहायता खेती के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा करेगी. इससे किसानों को नई तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक संसाधन मिलेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

Published: 13 Mar, 2026 | 08:38 PM

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