MP सरकार की वृंदावन ग्राम योजना लागू, पशुपालन और जैविक खेती करने वालों की चांदी

मध्य प्रदेश सरकार की वृंदावन ग्राम योजना गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. इस योजना के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाएं, पशुपालन और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और गांवों में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे, जिससे ग्रामीण जीवन बेहतर होगा.

नोएडा | Updated On: 27 Apr, 2026 | 11:19 AM

Mukhyamantri Vrindavan Gram Yojana: अगर गांव मजबूत होंगे तो देश भी मजबूत होगा. इसी सोच के साथ मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना शुरू की है. इस योजना का मकसद गांवों को ऐसा बनाना है जहां लोग खुशहाल रहें, रोजगार मिले और किसी भी तरह की परेशानी न हो. सरकार चाहती है कि गांवों में ही शहर जैसी सुविधाएं मिलें और लोग अपने गांव में ही आगे बढ़ें. यह योजना खेती, पशुपालन और रोजगार-तीनों को एक साथ जोड़कर गांवों की तस्वीर बदलने की कोशिश है.

क्या है वृंदावन ग्राम योजना?

मध्य प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2025 को इस योजना की शुरुआत की है. इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर  और आदर्श गांव बनाना है. इस योजना के तहत हर विधानसभा या जिले से ऐसे गांव चुने जाएंगे जिनकी आबादी 2000 से ज्यादा हो और जिनमें कम से कम 500 पशुधन (गौवंश) हो. चयनित गांवों को वृंदावन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा. इन गांवों में खेती, पशुपालन और सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि गांव पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकें. सरकार का मानना है कि इससे गांवों में विकास तेज होगा और लोगों की आय भी बढ़ेगी.

सीएम का लक्ष्य

मध्य प्रदेश (Madhya Pradeshके मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Mohan Yadav) ने इस योजना को लेकर साफ कहा है कि सरकार ऐसे गांव बनाना चाहती है जहां किसी भी तरह का झगड़ा या परेशानी न हो. उनका कहना है कि आदर्श गांव वही होगा जहां लोग शांति से रहें और सभी को सुविधाएं मिलें. सरकार का फोकस  सिर्फ विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक माहौल को भी बेहतर बनाना है. यानी गांवों में आपसी भाईचारा, शांति और सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे गांव सच में “वृंदावन” जैसा बन सके.

किसानों और पशुपालकों के लिए बड़े फायदे

इस योजना में किसानों और पशुपालकों  को सबसे ज्यादा फायदा मिलने वाला है. पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बड़ी गौशालाओं (5000+ क्षमता) को विकसित किया जाएगा. सरकार प्रति गौ-माता 40 रुपये का अनुदान देगी और 130 एकड़ तक भूमि प्रबंधन की सुविधा भी दी जाएगी. इसके साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकें. कृषि आधारित छोटे उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे गांव में ही रोजगार के नए अवसर बनेंगे. महिलाओं के लिए आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर और आजीविका भवन बनाए जाएंगे, जिससे वे भी आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें.

विकास कार्य और योजना लागू करने की प्रक्रिया

इस योजना के तहत गांवों में सड़क, नाली, बिजली, स्कूल, सामुदायिक भवन और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा. ई-पंचायत व्यवस्था लागू होगी, जिससे सरकारी काम आसान और तेज हो सकें. योजना को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग  लागू करेगा और इसके लिए 5 साल का विजन प्लान (DPR) तैयार किया जाएगा. गांव के सरपंच या सचिव को अपने गांव के लिए प्रस्ताव जिला प्रशासन के माध्यम से भेजना होगा. इसमें व्यक्तिगत आवेदन नहीं किया जा सकता. हर विधानसभा से एक गांव का चयन किया जाएगा और उसे पूरी तरह विकसित किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि ये गांव दूसरों के लिए उदाहरण बनें और धीरे-धीरे पूरे राज्य में ऐसे आदर्श गांव तैयार हों.

Published: 27 Apr, 2026 | 11:14 AM

Topics: