51 टन थाई मागुर तबाह! नागपुर में अवैध मछली पालन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
नागपुर में प्रतिबंधित थाई मागुर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है. पारशिवनी के 11 तालाबों से 36 टन से ज्यादा मछली जब्त कर नष्ट की गई. तीन महीने में कार्रवाई का आंकड़ा 51 टन पार पहुंच गया. प्रशासन ने तालाब मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है.
प्रतिबंधित थाई मागुर मछली के अवैध पालन के खिलाफ नागपुर के मत्स्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. पारशिवनी तालुका के चिचोली-महादुला क्षेत्र में विभाग की टीम ने 11 अवैध तालाबों पर छापा मारकर 36 टन से अधिक थाई मागुर मछली बरामद की. अधिकारियों ने मछलियों को तालाबों से बाहर निकलवाकर गहरे गड्ढों में दफना दिया. इस कार्रवाई के बाद नागपुर जिले में पिछले तीन महीनों में नष्ट की गई प्रतिबंधित थाई मागुर की मात्रा 51 टन से अधिक हो गई है. विभाग ने तालाब के कथित मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए शिकायत भी दर्ज कराई है.
11 तालाबों पर एक साथ छापा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मत्स्य विभाग को चिचोली-महादुला इलाके में प्रतिबंधित थाई मागुर के पालन की जानकारी मिली थी. इसके बाद अधिकारियों की टीम ने इलाके के 11 तालाबों पर छापेमारी की. जांच के दौरान इन तालाबों में बड़ी मात्रा में थाई मागुर मछली पाई गई. विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मछलियों को तालाबों से बाहर निकालने का अभियान शुरू किया. मछलियों को निकालने के लिए करीब 25 मछुआरों की मदद ली गई. कई घंटों की कार्रवाई के बाद 36 टन से अधिक थाई मागुर को बाहर निकाला गया. अधिकारियों ने इसे बाजार में पहुंचने से रोकने के लिए मौके पर ही नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी की.
गहरे गड्ढों में दफनाई गई मछलियां
जब्त की गई थाई मागुर को नष्ट करने के लिए गहरे गड्ढे तैयार किए गए. मछलियों को इन गड्ढों में दफना दिया गया, ताकि प्रतिबंधित प्रजाति दोबारा किसी जलस्रोत में न पहुंच सके. विभाग के मुताबिक, यह कार्रवाई अवैध मत्स्यपालन पर रोक लगाने के अभियान का हिस्सा है. इससे पहले भी नागपुर जिले में प्रतिबंधित थाई मागुर के खिलाफ कार्रवाई की गई है. ताजा अभियान के बाद तीन महीने में नष्ट की गई थाई मागुर की कुल मात्रा 51 टन से अधिक हो गई है. इतनी बड़ी मात्रा में मछली मिलने से इलाके में अवैध पालन के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है.
पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा
थाई मागुर को स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरनाक माना जाता है. यह मांसाहारी प्रजाति छोटी मछलियों और अन्य जलीय जीवों का शिकार करती है. इसके तेजी से फैलने पर स्थानीय मछली प्रजातियों के अस्तित्व पर असर पड़ सकता है और जल पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है. इसके अलावा, अस्वच्छ परिस्थितियों में पाली जाने वाली थाई मागुर को मानव स्वास्थ्य के लिहाज से भी चिंता का विषय माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार गंदे पानी और कचरे वाले वातावरण में पाले जाने पर ऐसी मछलियों में हानिकारक रोगजनक और प्रदूषक जमा होने का जोखिम रहता है.
तालाब मालिक के खिलाफ शिकायत दर्ज
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार. मत्स्य विभाग ने कार्रवाई के दौरान तालाब के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए शिकायत दी है. अब विभाग अवैध पालन से जुड़े अन्य लोगों और गतिविधियों की भी जांच कर सकता है. थाई मागुर के पालन और कारोबार पर रोक पर्यावरणीय चिंताओं के चलते लगाई गई है. अदालतों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के बाद इस प्रतिबंधित प्रजाति के खिलाफ देशभर में कार्रवाई की जाती रही है. नागपुर में हुई यह कार्रवाई भी प्रतिबंधित मछली के अवैध पालन के खिलाफ प्रशासन की सख्ती को दिखाती है.